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कानून वापस नहीं लिया तो तीर्थ पुरोहित समाज करेगा आंदोलन

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शामली में गंगोत्री धाम के रावल शिवप्रकाश महाराज का स्वागत करते व्यापारी मनोज मित्तल व परिजन - फोटो : SHAMLI
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कानून वापस नहीं लिया तो तीर्थ पुरोहित समाज करेगा आंदोलन
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शामली। गंगोत्री धाम के रावल शिव प्रकाश महाराज ने उत्तराखंड सरकार द्वारा चारों धाम और मंदिरों के लिए बनाए कानून का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि उत्तराखंड सरकार ने कानून को वापस नहीं लिया तो रावलवृंद और तीर्थ पुरोहित सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर चार जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मिला है।
बुधवार को बड़ा बाजार में पूर्व सभासद मनोज मित्तल के आवास पर गंगोत्री धाम के रावल पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि धाम के कपाट बंद होने पर छह महीने तक देश के विभिन्न राज्यों में घूमकर धर्म, गंगा और संस्कृति का प्रचार करते हैं। पंजाब से भ्रमण करते हुए शामली पहुंचे रावल ने बताया कि उत्तराखंड सरकार चारों धाम और विभिन्न अंचलों में स्थापित करीब 51 मंदिरों को लेकर कानून बना रही है। इस कानून के तहत धाम और मंदिरों में अधिकारियों को नियुक्त किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कानून धाम और मंदिरों के संरक्षा संवर्धन के लिए बनाया जा रहा है। लेकिन इस तरह का कोई भी कानून धार्मिक दृष्टि से गलत है। वह इसका विरोध करते हैं। सरकार को इस तरह का निर्णय लेने से पहले रावल, पुरोहितों और धर्माचार्यों से बात करनी चाहिए थी। सरकार इस कानून को उन पर थोपना चाहती है। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने से विधि विधान के अनुसार धार्मिक कार्यक्रम नहीं हो सकेंगे, जिससे प्राकृतिक दैवीय आपदाएं होगी। छह साल पहले केदारनाथ धाम का उदाहरण सबके सामने है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार इस पर विचार करेगी। इस अवसर पर मनोज मित्तल, प्रमोद मित्तल, नितिन संगल, विकास मौजूद रहे।
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कानून को लेकर राज्यों में चल रहा संपर्क अभियान
शामली। गंगोत्री धाम के रावल शिव प्रकाश महाराज ने कहा कि उन्होंने इस कानून को लेकर अखाड़ा परिषद के महंत से भी फोन पर बात की है, उन्होंने इस मामले में सहयोग देने की बात कही है। इसके अलावा वह अपने भ्रमण के दौरान पंजाब में भी धर्म संस्थाओं से बातचीत कर चुके हैं। सभी से समर्थन और सहयोग मिल रहा है। अगले महीने राजस्थान, गुजरात व अन्य राज्यों में भी धर्म संस्थाओं से संपर्क करेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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