शामली। सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए किसानों को फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी गई है। सभी किसानों की डिजिटल डाटा के रूप में फार्मर रजिस्ट्री बनेगी। इसके लिए विभिन्न गांवों में शिविर लगाकर किसानों की रजिस्ट्री कराई जा रही है। मगर पोर्टल में तकनीकी खामी के कारण किसान अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है।
रजिस्ट्री की अंतिम तारीख 20 जनवरी है। जिले में 4 दिसंबर से लेकर अभी तक सिर्फ 2833 किसानों का ही डाटा तैयार हो पाया है। सवाल यह उठता है कि मात्र 31 दिन में किस तरह कृषि विभाग के अधिकारी 98874 किसानों की रजिस्ट्री करा सकेंगे।
भारत सरकार की एग्रीस्टैक योजना के तहत फार्मर रजिस्ट्री तैयार होनी है। जिसके लिए जुलाई माह में आदेश दिए गए थे। शासन ने अब पांच जनवरी तक किसानों की रजिस्ट्री कराने के आदेश दिए हैं, जिसे अब बढ़ाकर 20 जनवरी किया गया है। जिले में 101707 किसानों की रजिस्ट्री होनी है। कृषि विभाग के अधिकारी विभिन्न गांवों में शिविर लगाकर रजिस्ट्री कराने में जुटे हुए हैं। फरवरी माह में सम्मान निधि की 19वीं किस्त आनी है यदि फार्मर रजिस्ट्री नहीं हुई तो किश्त रुक जाएगी।
इस तरह परेशान हो रहे किसान
चौसाना के किसान शब्बीर का कहना है कि शिविर में भी गया था मगर पोर्टल में तकनीकी खामी के कारण परेशानी हो रही है। अभी तक डाटा ऑनलाइन नहीं हो पाया है।
पठानपुरा के चरण सिंह का कहना है कि पोर्टल में तकनीकी खामी के कारण अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, मगर समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है।
किसान मुकेश कुमार का कहना है कि अधिकारियों को पोर्टल में आईं खामियों को दूर कराना चाहिए, ताकि किसानों की तुरंत ही आईडी बन सके। उन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो।
शिविरों में यह परेशानी भी आ रही आड़े
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कुछ किसानों के आधार और जमीन की नकल में नाम अलग है, भूलेख पोर्टल में जमीन दर्ज नहीं है, नाम मिसमैच की समस्या सबसे अधिक है, जिसके कारण किसानों को लौटना पड़ रहा है।
फार्मर रजिस्ट्री का किसानों को यह होगा फायदा
फार्मर रजिस्ट्री से पीएम सम्मान निधि ही नहीं बल्कि फसल बीमा, एमएसपी, कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड जैसी योजनाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। जन सेवा केंद्र के माध्यम से भी डाटा बनवाया जा सकता है।
यह जानकारी किसान को देनी होगी
फार्मर रजिस्ट्री में किसान व उसके पिता नाम, उसके स्वामित्व वाले सभी गाटा संख्या, सह खातेदार होने की स्थिति में गाटा किसान का अंश, मोबाइल नंबर, आधार संख्या, ई केवाईसी का विवरण आदि।
विभिन्न गांवों में शिविर लगाकर किसानों का डाटा ऑनलाइन किया जा रहा है। पोर्टल में तकनीकी खामी के कारण दिक्कत आ रही है। अधिकारियों को मामले से अवगत कराया गया है। अधिकारियों को इस संबंध में पत्र भी भेज जाएगा।
प्रमोद कुमार, उप कृषि निदेशक