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संसाधनों के बिना कैसे हो मरीजों का उपचार

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झिंझाना। चिकित्सा संसाधनों के बिना किसी रोग का उपचार ठीक से संभव नहीं हो पाता। वैसे ही झिंझाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले करीब डेढ़ साल से दंत चिकित्सक की तैनाती है, लेकिन संसाधन के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। काफी संख्या में दंत मरीज अस्पताल में आते तो हैं, लेकिन संसाधनों की कमी में मायूस लौट जाते हैं।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर छह से सात किमी तक के दायरे के मरीज विभिन्न प्रकार के रोगों का उपचार कराने के लिए आते हैं। करीब डेढ़ साल से यहां दंत चिकित्सक सुनील कुमार की तैनात है, मगर संसाधनों के अभाव में मरीजों को सिर्फ रोकथाम के लिए दवाई दे देते हैं।
दंत रोगी मोनिका, राजपाल, कन्हैया, अलका, पिंटू, बानो, साक्षी आदि ने बताया कि अस्पताल में डेंटल चेयर नहीं है और न ही कोई एक्स-रे या कोई मशीन है। जिसके चलते उन्हें समुचित इलाज नहीं मिल पाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रिंस मिश्रा ने बताया कि कोरोना काल के लगभग दो वर्ष पूरे होने को है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग का ध्यान कोरोना से निपटने में था। उच्चाधिकारियों को पत्र लिख है और हमें जल्द ही संसाधनों के पूरा होने का आश्वासन मिला है।
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