यह बहस का विषय ही नहीं होना चाहिए
सवाल के जवाब में सांसद इकरा हसन ने साफ कहा कि देश में इससे कहीं ज्यादा गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर सरकार और मीडिया को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हिजाब पहनना या न पहनना किसी महिला की निजी इच्छा पर निर्भर करता है। इसे ओपन छोड़ा जाना चाहिए। अगर कोई किसी को हिजाब पहनने या न पहनने के लिए मजबूर करता है, तो वह लोकतंत्र नहीं है।'
महिलाओं की आजादी का मामला
इकरा हसन ने कहा कि यह फैसला पूरी तरह संबंधित महिलाओं पर छोड़ देना चाहिए और इस पर बार-बार बहस करना ठीक नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशों में ऐसे मुद्दों को तूल नहीं दिया जाता, बल्कि असली समस्याओं पर ध्यान दिया जाता है।
संस्कृति और परंपरा का भी जिक्र
सांसद ने कहा, 'मैं खुद एक मुस्लिम महिला हूं और ऐसे क्षेत्र से आती हूं, जहां सभी समाज की महिलाएं सिर ढकती हैं। यह हमारी संस्कृति है, लेकिन इसे किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए।'
अन्य मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत
उन्होंने दो टूक कहा कि समाज और सरकार को शिक्षा, रोजगार, महंगाई और महिलाओं की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर फोकस करना चाहिए, न कि पहनावे को राजनीतिक बहस का विषय बनाना चाहिए।