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Shamli News: गैजेट संग खेला दिनभर, अब गर्दन बोली-बस कर

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शामली। मोबाइल और लैपटॉप के लंबे समय तक उपयोग ने युवाओं की सेहत पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। घंटों तक झुककर मोबाइल देखने या कंप्यूटर पर बैठकर काम करने की आदत अब गर्दन और रीढ़ की हड्डी के लिए खतरनाक साबित हो रही है। जिला अस्पताल में हर सप्ताह 10 से 12 मरीज टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। चिकित्सक लोगों को लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप का प्रयोग न करने की सलाह दे रहे हैं।
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मामलों की बानगी...
केस-1
लिलौन निवासी शाबिर दिनभर मोबाइल फोन चलाते थे। धीरे-धीरे गर्दन में दर्द बढ़ा और अब सिर उठाना भी मुश्किल हो गया है। जिला अस्पताल में उनका इलाज जारी है।
केस-2
रेलवे रोड निवासी मनोज लंबे समय तक लैपटॉप और मोबाइल पर काम करते थे। लगातार दर्द और अकड़न की शिकायत के बाद वह भी अब इलाज करवा रहे हैं।
ये दोनों मामले इस बढ़ती समस्या मात्र उदाहरण हैं। इसके अलावा भी कई अन्य मामले इस बीमारी के सामने आ रहे हैं।
क्या है टेक्स्ट नेक सिंड्रोम
जिला अस्पताल की चिकित्सक डॉ. सानिया मिर्जा बताती हैं कि यह एक मस्क्युलो-स्केलेटल डिसऑर्डर है, जो लंबे समय तक झुककर स्क्रीन देखने से होता है। इससे गर्दन, कंधे और पीठ की मांसपेशियों में जकड़न, सिरदर्द, चक्कर और दर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यह तकलीफ आगे चलकर भोजन निगलने में दिक्कत और रीढ़ की हड्डी टेढ़ी होने तक का कारण बन सकती है।

मुख्य कारण
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रामनिवास के अनुसार इसके मुख्य कारण ये हैं।

1. मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप का घंटों तक प्रयोग।
2. झुककर या खराब मुद्रा में स्क्रीन देखना।
3. कम शारीरिक गतिविधि और लंबे समय तक बैठे रहना।

मुख्य लक्षण
गर्दन और ऊपरी पीठ में दर्द या जकड़न।
सिरदर्द और मांसपेशियों में अकड़न।
कंधों और बाजुओं में दर्द या सुन्नता।
हाथों और उंगलियों में झुनझुनी या कमजोरी महसूस होना।

बचाव के उपाय
मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखें।
बैठते समय रीढ़ को सीधा रखें।
हर आधे घंटे में थोड़ी देर टहलें या खिंचाव करें।
योग और हल्का व्यायाम करें ताकि मांसपेशियां मजबूत रहें।
थैरेपी से मिल रही राहत

फिजियोथैरेपिस्ट सुनील कुमार के अनुसार अब बुजुर्गों के साथ-साथ युवा भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं। मोबाइल और लैपटॉप का अत्यधिक उपयोग करने से गर्दन व पीठ दर्द की शिकायत बढ़ रही है। फिजियोथैरेपी के जरिये ऐसे मरीजों को धीरे-धीरे राहत दी जा रही है।
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