कैराना। दशकों से चले आ रहे हरियाणा-यूपी सीमा विवाद के मद्देनजर शुक्रवार को कैराना तहसील सभाकक्ष में दोनों प्रदेशों के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में दोनों प्रदेशों के तहसीलदारों की देखरेख में कानूनगो और लेखपालों ने सीमा पर विवादित भूमि के 1958 से पहले के अभिलेखों का मिलान कराया। रिकार्ड के आधार पर हरियाणा प्रशासन यह मान गया कि विवादित भूमि यूपी की है।
हरियाणा-यूपी सीमा विवाद के चलते शुक्रवार को कैराना तहसील सभा कक्ष में दोनों प्रदेशों के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक के दौरान हरियाणा के बापौली के तहसीलदार नवनीत कुमार, कैराना तहसीलदार अभय राज पांडेय की देख-रेख के दोनों प्रदेशों के कानूनगो और लेखपालों ने हरियाणा के रीशपुर गांव के तीन मजरों के पास की विवादित तीन बीघा भूमि के सन 1958 से पहले के राजस्व अभिलेखों का मिलान कराया।
अभयराज पांडेय और नवनीत कुमार ने बताया कि विवादित भूमि के अभिलेख दोनों प्रदेशों के एक समान पाए गए हैं। उन्होंने माना कि दीक्षित आयोग द्वारा लगाए गए पिलरों से इस ओर की भूमि पर यूपी के राजस्व विभाग का अधिकार बनता है, लेकिन हरियाणा के राजस्व रिकार्ड से उक्त भूमि का रिकार्ड डिलीट नहीं होने के कारण विवाद बना हुआ है। विवाद को हल करने के लिए वे उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट बना कर भेजेंगे।
जिसके बाद दोनों प्रदेशों के कमिश्नर स्तर पर ही फैसला होने के बाद हरियाणा के राजस्व रिकार्ड से पिलर से इस ओर की भूमि का राजस्व रिकार्ड डिलीट किया जा सकेगा। जिसके बाद ही सीमा विवाद हल होगा।
उन्होंने सीमा विवाद पर आगामी बैठक की कोई तारीख निश्चित नहीं की। इस अवसर पर कैराना एसडीएम विजय प्रकाश तिवारी, कैराना सीओ भूषण वर्मा,
कैराना कोतवाली प्रभारी राज कुमार शर्मा, सनौली एसएचओ नरेंद्र कुमार, बापौली कानूनगो नरेश कुमार, कैराना राजस्व प्रभारी कोमिंद्र कुमार, कानूनगो राकेश कुमार, कैराना लेखपाल राजेश कुमार के अलावा मवी के ग्राम प्रधान दिलशाद, शिव कुमार, पवन कुमार, मेघराज आदि मौजूद रहे।
प्रशासन के रवैये पर भड़के यूपी के किसान
कैराना। यूपी-हरियाणा सीमा विवाद पर आयोजित की गई प्रशासन की बैठक के दौरान प्रशासन द्वारा अपनाए गए रवैये पर यूपी के किसान भड़क गए और हंगामा किया।
चेतावनी दी कि प्रशासन न्याय निष्पक्षता से करें, नहीं तो शिकायत सीएम को जाएगी।शुक्रवार को कैराना तहसील में दोनों प्रदेशों के अधिकारियों की बैठक हुई। इस दौरान वहां मवी के किसानों से अधिकारियों ने कहा कि विवाद का फैसला न होने तक विवादित भूमि पर कोई कार्य नहीं करेंगे।
जिस पर प्रधान दिलशाद व शिवकुमार आदि ने पूछा कि जब यूपी के किसान फैसले तक विवादित भूमि पर कार्य नहीं करेंगे तो हरियाणा के किसानों को भी रोका जाए। जिस पर अधिकारियों ने कहा कि हरियाणा के किसान वहां जा सकते है। इस बात पर मवी के किसान भड़क उठे और हंगामा कर दिया।
पवन कुमार, मेघराज आदि ने बताया कि पिलर से इस ओर की जमीन हमारी है। 40 साल से आज तक कोई फैसला नहीं हुआ और अब भी हमें हमारी जमीन पर कार्य करने से रोका जा रहा है। अगर ऐसा हुआ तो वे मुख्यमंत्री के दरबार में जाकर गुहार लगाएंगे।