पूर्व विधायक राव अब्दुल वारिस।
- फोटो : amar ujala
शामली। बसपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी के करीबी माने जाने वाले थानाभवन के पूर्व विधायक राव अब्दुल वारिस को पार्टी से निकाल दिया गया। इस संबंध में बसपा के मेरठ मंडल जोन कोआर्डिनेटर डाक्टर पुरुषोत्तम ने जारी बयान में इस बात की पुष्टि की है। शामली के जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारी ने इसकी जानकारी होने से इंकार किया है।
थानाभवन के गांव कैंडी निवासी राव अब्दुल वारिस 2007 में रालोद के टिकट पर थानाभवन से विधायक बने थे। इसके बाद वह बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए थे। 2012 तथा पिछले दिनों 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर थानाभवन विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। 2012 के चुनाव में वह करीब 50 हजार वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे, जबकि 2017 के चुनाव में करीब 74 हजार वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे। करीब आठ साल तक बसपा में रहे।
वहीं, बृहस्पतिवार शाम को बसपा के मेरठ मंडल जोन कोआर्डिनेटर डॉक्टर पुरुषोत्तम की तरफ से जारी बयान में राव अब्दुल वारिस को पार्टी विरोधी गति
विधियों में लिप्त होने के कारण पार्टी से निकालने की बात कही गई। वहीं, पार्टी से निकाले जाने के बारे में राव अब्दुल वारिस का कहना है कि उन्होंने हमेशा पार्टी हित में कार्य किया। उन्हें नहीं मालूम कि पार्टी से निकालने की क्या वजह है। उधर, इस बारे में बसपा के शामली जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार गौतम तथा जिला प्रभारी दिवाकर कश्यप का कहना है कि पूर्व विधायक अब्दुल वारिस को पार्टी से निकाले जाने की उन्हें कोई सूचना नहीं मिली है।