शामली। आयरन ही नहीं, अब हैंडपंपों के पानी में हार्ड मेटल की भी जांच की जाएगी। जिले में 26 गांवों और चार निकायों में एनजीटी ने हैंडपंपों से खराब पानी निकलने की रिपोर्ट दी थी। पहले विभाग ने पानी में आयरन की जांच की, लेकिन अब एनजीटी ने हार्ड मैटल (आर्सेनिक और लैड) की भी जांच होगी। इसके लिए विभाग ने फिर से सर्वे शुरू कर दिया है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जिले में हैंडपंपों से प्रदूषित पानी निकलने की शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाया और इन गांवों में सर्वे करने के लिए जल निगम को आदेशित किया। ताकि गांवों में प्रदूषित पानी वाले हैंडपंपों को चिह्नित कर बंद किया जा सके, लेकिन अधिकारी इन आदेशों को भूल गए और करीब दो माह बीतने के बाद भी इन गांवों में सर्वे पूरा नहीं हो सका। इनमें से करीब नौ गांवों में सर्वे किया गया।
हैंडपंपों के पानी की आयरन की जांच कराकर रिपोर्ट एनजीटी को भेजी गई, लेकिन एनजीटी ने पानी में हार्ड मैटल की भी जांच करने के आदेश दिए। जिसके बाद विभाग ने दोबारा से सर्वे शुरू कर दिया है। एनजीटी के आदेश को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं है। यही कारण है कि करीब ढाई महीने के बीतने के बावजूद भी सर्वे का कार्य पूरा नहीं हो सका।
एनजीटी ने जिन गांवों की रिपोर्ट दी है, उनसे से कई में हैंडपंप गंदा पानी उगल रहे हैं। इसके बावजूद भी विभाग ने उन पर सील नहीं लगाई। इनमें लिलौन, फतेहपुर, काबड़ौत, झाल आदि गांवों में कोई सर्वे नहीं हुआ है। नगर निकायों शामली, एलम, बनत में भी किसी हैंडपंप पर अभी तक सील नहीं लगी है।
यहां होना था सर्वे
जमालपुर, कुतुबगढ़, सोंटा रसूलपुर, रायपुर, गोगवान, हिरनवाडा, लाडो माजरी, बंतीखेड़ा, समसपुर, फतेहपुर, खानपुर तलवा, भिक्की देह, बरला जट, झाल, काबड़ौत, बुटराडी, सल्फा, मतनावली, किवाना, ख्वाजपुर, सुन्ना, भनेड़ा, मालेंडी, कुड़ाना, लिसाढ़, लिलौन। नगर पंचायत बनत, एलम, थानाभवन व नगरपालिका शामली।