किवाना का दिलेर सीआरपीएफ का जवान सतेंद्र गोली लगने के बाद भी आतंकियों से मुकाबला करता रहा। घायल होने के बाद भी उसने आतंकियों पर फायर किए। उसकी गोली एक आतंकी को भी गोली लगी।
शहीद सतेंद्र के पिता मुनीराम ने बताया कि बुधवार रात को जब उनकी सतेंद्र की बटालियन के एक अफसर से फोन पर बात हुई तो उन्होंने जवानों की टुकड़ी पर आतंकी हमले की जानकारी दी। बताया कि सतेंद्र बहुत दिलेर जवान था। आतंकियों ने उसकी टुकड़ी पर हमला किया तो एक आतंकी की गोली उसे लगी, लेकिन गोली लगने के बाद भी उसने हार नहीं मानी। वो आतंकियों को खदेड़ने के लिए फायर करता रहा। घायल हालत में भी उसने फायर किया और ये संभवत: उसकी गोली एक आतंकी को भी लगी है। सतेंद्र के पिता के अनुसार सतेंद्र बचपन से ही बड़ा दिलेर था। कहीं से भी सेना की टुकड़ी या वाहन गुजरते तो वो उन्हें देखकर बड़ा खुश होता था। उन्हें सलामी देने लगता था। सेना के जवानों से हाथ मिलाने लगता। उसकी अच्छा किशोर अवस्था में ही सेना या पुलिस में जाने की थी। 2010 में जब वो सीआरपीएफ में भर्ती हुआ तो बहुत खुश था। छत्तीसगढ़ के बाद जब उसकी पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में हुई तो वो बहुत खुश हुआ कहा कि वहां पर तो आतंकियों को सबक सिखाने का मौका मिलेगा ही।
छत्तीसगढ़ में हुई थी पहली पोस्टिंग
शहीद सतेंद्र की शादी शादी सात वर्ष पूर्व बागपत के गांव निरपड़ा निवासी सोनिया के साथ हुई थी। शहीद सैनिक की प्रारंभिक शिक्षा गांव में होने के बाद उसने कांधला में श्री चंदन लाल नेशनल इंटर कॉलेज से अपनी हाईस्कूल तक की पढ़ाई को पूरा किया। वर्ष 2010 में वह केरल में ट्रेनिंग के बाद पहली पोस्टिंग छत्तीसगढ़ में हुई थी। वर्तमान में लगभग तीन वर्ष से पुलगांव में ड्यूटी पर तैनात रहकर देश की सेवा कर रहा था।