दलाल-1
संवाददाता - भाई, लर्निंग लाइसेंस बनवाना है, कितने रुपये लोगे
दलाल- 1200 रुपये लगते हैं, तुम 900 रुपये दे देना
संवाददाता : टेस्ट का कैसे होगा ?
दलाल- 900 रुपये टेस्ट के ही मांग रहे हैं, हम सब कुछ खुद करेंगे, तुम्हें तीन दिन बाद लर्निंग लाइसेंस मिल जाएगा।
संवाददाता- ओके, कल आता हूं।
दलाल-2
संवाददाता- भाई, लर्निंग लाइसेंस बनवाना है, कितने में बनेगा?
दलाल- तुम 1200 रुपये दे देना
संवाददाता : ज्यादा मांग रहे हो यार
दलाल- टेस्ट भी तो हम ही करेंगे, तुम्हारे वश की बात नहीं है टेस्ट करना
संवाददाता- 900 रुपये ले लो
दलाल- उसने आधार कार्ड की कॉपी और अन्य कागजात के साथ 900 रुपये ले लिए, कहा कि एक मैसेज आएगा, जब वह आ जाए, मेरे पास आ जाना
दो दिन बाद संवाददाता- मैसेज आ गया है
दलाल- मैसेज को देखने के बाद दूसरे दलाल से कंप्यूटर से प्रक्रिया पूरी करने के बाद लर्निंग लाइसेंस बनाकर दे देता है
संवाददाता- कैसे करते हो तुम ये सब
दलाल : एआरटीओ कार्यालय के अंदर हमारी सेटिंग होती है, जिससे आसानी से काम हो जाता है
सिर्फ बैठा रहा अभ्यर्थी, खुद सॉल्व किया टेस्ट
पड़ताल के दौरान मोबाइल पर मैसेज आने के बाद दलाल ने लर्निंग लाइसेंस के लिए टेस्ट देने के लिए अभ्यर्थी को एक कंप्यूटर पर कैमरे के सामने बैठाया। दूसरे कंप्यूटर पर बैठकर खुद ही टेस्ट को सॉल्व कर दिया। मात्र पांच मिनट में दलाल ने टेस्ट साल्व कर दिया और लर्निंग लाइसेंस की कॉपी दे दी।
एआरटीओ कार्यालय के अंदर जन सेवा केंद्र पर भी वसूली
संवाददाता- भाई लर्निंग और डीएल लाइसेंस बन जाएगा?
कर्मचारी - हां बन जाएगा।
संवाददाता - कितने रुपये लगेंगे।
कर्मचारी : 900 रुपये दे देना, पहले अपना आधार कार्ड दिखाओ।
संवाददाता- आधार कार्ड मोबाइल पर मंगवाकर दिखा देता है, डीएल के कितने लगेंगे?
कर्मचारी : 1500 रुपये
संवाददाता- ओके बनवाता हूं
कर्मचारी : किसी को बताना नहीं कि मेरे से आपकी बात हुई है।
-दलालों के फेर में फंसकर दर-दर की ठोकरें खा रहे लोग
केस-1
बहावड़ी गांव के रहने वाले पिंटू ने बताया कि उसने एआरटीओ कार्यालय के बाहर बैठने वाले दलाल को एक हजार रुपये लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए दिए थे। आरोप है कि 15 दिन बाद भी उसका लाइसेंस नहीं बनाया गया। वह दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।
केस-2
बहावड़ी गांव के ही योगेश कुमार ने बताया कि उसने 15 दिन पहले एआरटीओ कार्यालय के बाहर ही दलाल को लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए एक हजार रुपये दिए थे। मगर उसका अभी तक लाइसेंस नहीं बनाया गया। रुपये मांगने पर उससे कहा जा रहा है कि जहां शिकायत करनी है कर लो।
-एआरटीओ कार्यालय के बाहर लगा रहता है जमावड़ा, अंदर भी कोई रोक-टोक नहीं
पड़ताल के दौरान सामने आया है कि दलालों की अंदर भले ही एंट्री बैन होने का दावा किया जाता हो मगर अंदर और बाहर इनका जमावड़ा लगा रहता है। अंदर कोई भी रोक-टोक नहीं है। चालकों के अन्य काम कराने में भी दलाल आगे नजर आते हैं। एक दलाल ने बताया कि वह एक साल से अधिक समय से यहां पर काम कर रहा है। कई दलालों ने यहां पर फोटो स्टेट से लेकर अन्य की दुकानें भी खोली हुईं हैं।
-लर्निंग लाइसेंस और डीएल की फीस
लर्निंग लाइसेंस की 350 और डीएल की एक हजार रुपये फीस निर्धारित की गई है।
-एआरटीओ कार्यालय के अंदर और बाहर दलालों द्वारा डीएल और लर्निंग लाइसेंस बनवाने की जानकारी नहीं है। जानकारी कराकर कार्रवाई कराई जाएगी। दलालों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा। लोगों को ऐसे दलालों के बहकावे में नहीं आना चाहिए। ऑनलाइन आसानी से लर्निंग लाइसेंस या फिर डीएल के लिए आवेदन किए जा सकते हैं।
- रविंद्र सिंह, डीएम शामली
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