शामली। आयुष्मान और आधार कार्ड बनाने का खेल करने वाले गिरोह के सदस्य ग्राहकों से रुपये लेने के लिए सिर्फ क्यूआर कोड का ही प्रयोग करते थे। क्यूआर कोड पर रुपये भेजते ही चंद मिनटों में काम करा दिया जाता था। पुलिस के हाथ कई क्यूआर कोड लगे हैं, जिनके माध्यम से गिरोह के कई सदस्य चिह्नित कर लिए गए हैं।
जिलाधिकारी रविंद्र सिंह, एसपी रामसेवक गौतम ने मामले की जांच सर्विलांस, साइबर सेल के अलावा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सौंपी हुई है। दो गिरोह के सदस्यों के खिलाफ साइबर थाने में मामला दर्ज कराया गया था। पुलिस को पता चला है कि गिरोह में शामली के अलावा बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर के लोग भी शामिल है।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका की भी होनी चाहिए जांच
शामली। बिना स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत के आयुष्मान कार्ड कैसे बनाया जा सकता है। यह सवाल हर किसी के दिमाग में घर कर रहा है। रालोद कार्यकर्ता राजन जावला, सुनील कुमार का कहना है कि मामले में जिलाधिकारी को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करानी चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई हो।
भाई , अब बंद कर दिया धंधा
गिरोह के एक सदस्य से आयुष्मान कार्ड बनवाने का प्रयास किया। जिस पर उसने कहा कि अब उन्होंने काम पूरी तरह से बंद कर दिया है। मीडिया वाले उनके पीछे पड़े हैं। कहीं और काम करा लेना वरना हम फंस जायेंगे। उधर, अमर उजाला में खबर प्रकाशित होते ही व्हाट्सएप ग्रुप से भी अधिकर सदस्यों को हटा दिया गया।
बहकावे में नहीं आने की अपील
जिलाधिकारी अरविंद चौहान का कहना है कि लोगों को आयुष्मान या फिर आधार कार्ड बनवाने के लिए किसी के भी बहकावे में नहीं आना है। यदि कोई गलत कार्य कर रहा है तो इसकी सूचना दें, तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।