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फूल विक्रेताओं को अब भगवान के द्वार खुलने से आस

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किरण पाल। - फोटो : SHAMLI
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फूल विक्रेताओं को अब भगवान के द्वार खुलने से आस
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शामली। इस बार जनवरी से मई तक शादियों का जबर्दस्त साया था। फूल विक्रेताओं को भी अच्छे काम की उम्मीद थी। इधर उधर से रुपयों का भी इंतजाम किया, लेकिन लॉकडाउन से उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। शादी का साया तो गया ही, धर्मस्थलों के कपाट बंद होने से तो उनकी कमर ही टूट गई। ढाई महीने बाद आठ जून से भगवान धर्मस्थलों के बंद कपाट खुलेंगे। ऐसे में फूल विक्रेताओं को कुछ काम निकलने की आस जगी है। अमर उजाला ने शहर के फूल विक्रेताओं से बात की। पेश है रिपोर्ट-
लॉकडाउन ने सारी उम्मीदें तोड़ दी
शहर के वीवी इंटर कॉलेज रोड पर फूल विक्रेता किरणपाल अपनी दुकान पर खाली बैठा था। सामने फूलों की तैयार मालाएं रखी थी, लेकिन ग्राहक नदारद थे। पूछने पर बताया कि उनकी कमाई तो शादी के सीजन में होती है। इस साल जनवरी से मई तक लंबे साये थे। कुछ रुपयों का इंतजाम किया था। सोचा था इस बार काम बढ़ाएंगे, लेकिन मार्च में लॉकडाउन लग गया और सारी उम्मीदें खत्म हो गई। इन दिनों दिन में 200 रुपये की दुकानदारी भी नहीं हो रही। दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी मुश्किल है। आठ जून से धर्मस्थल खुलने को सुना है । कुछ तो काम निकलेगा। हमारी तो लागत भी नहीं निकल रही। शहर की नाला पटरी पर एक चबूतरे पर फूल रखकर माला तैयार कर रहे शाहबाज ने बताया कि लॉकडाउन में शादी के पूरे साये निकल गए। दिल्ली की गाजीपुर मंडी से फूल आते हैं, लॉकडाउन के बाद से मंडी भी बंद है। आसपास में गेंदा बोने वाले किसानों से 20 रुपये किलो 10-12 किलो गेेंदा लाकर माला बनाकर बेचते हैं, लेकिन कभी कभी तो माल की लागत भी पूरी नहीं हो रही। अब सरकार ने आठ जून से धर्मस्थलों को खोलने की बात कही है। उम्मीद है कि उनकी कुछ तो बिक्री बढे़गी।
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अब आवाज लगाकर बुलाने पड़ रहे ग्राहक
वीवी इंटर कॉलेज पर अपनी फूल की दुकान पर गुलाब का गुलदस्ता बना रहे सोनू ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कारोबार का ये हाल कभी नहीं देखा। शादी के दो सीजन में ही पूरे साल की कमाई होती थी, लेकिन इस बार लॉकडाउन ने सब काम बिगाड़ दिया। हालत ये है कि शादी के सीजन में उनकी दुकान पर भीड़ होती थी। ग्राहक एक महीना पहले जयमाला बुकें बुक कराते थे आज सड़क पर चलते ग्राहक को आवाज लगाकर फूल वाले माल बेच रहे हैं। सुबह जब किसान से माल मंगाते हैं तो डर रहता है कि इसकी लागत भी निकलेगी या नहीं। अब तो आठ जून से धर्मस्थल खुलने पर भगवान से ही कुछ काम निकलने की आस है।

शाहनवाज- फोटो : SHAMLI

सोनू।- फोटो : SHAMLI

शामली में एक दुकान पर रखा गुलाब का गुलदस्ता।- फोटो : SHAMLI

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