शामली। दीपावली का पर्व नजदीक आ रहा है। इस त्योहार पर अक्सर आग लगने की घटनाएं होती रही है। संसाधनों की कमी से जूझ रहे दमकल विभाग के कर्मचारियों को शहर और कस्बे की संकरी गलियों में आग लगने की घटनाओं के दौरान मशक्कत करनी पड़ती है।
जनपद मुख्यालय पर स्थित दमकल विभाग के पास संसाधनों के नाम पर दमकल विभाग के पास छह हजार लीटर क्षमता वाली एक बड़ी गाड़ी वाटर टेंडर हाई प्रेशर वाली, 400-400 लीटर क्षमता वाली दो वाटर मिस्ट हाई प्रेशर पंप (छोटी गाड़ी) और एक डीजल पंप गाड़ी है। बड़ी गाड़ी और एक छोटी गाड़ी को शामली मुख्यालय पर रखा गया है जबकि एक छोटी गाड़ी को कैराना तहसील में रखा गया है। ऊन तहसील में कोई गाड़ी नहीं है। ऐसी स्थिति में अगर आग लगने की बड़ी घटना होती है तो शामली से ही बड़ी गाड़ी मौके पर पहुंचती है लेकिन तब तक आग से संपत्ति को काफी नुकसान हो चुका होता है।
एफएसओ का पद चल रहा खाली
शामली में फायर स्टेशन ऑफिसर का पद कई साल से रिक्त चल रहा है। उनके स्थान पर सब इंस्पेक्टर अजीज खान फायर स्टेशन के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इनके अलावा स्टाफ में यहां पर सीएफओ, चार हेडकांस्टेबल (लीडिंग फायर मैन), 21 कांस्टेबल (फायर मैन) और छह चालक हैं। अधिकारियों के मुताबिक पदों के सापेक्ष पांच कांस्टेबलों की कमी है।
सड़क में दब गए फायर हाईड्रेंट
शहर में कहीं भी फायर हाईड्रेंट नहीं है। सड़क के चौड़ीकरण और ऊंचाई बढ़ने के चलते फायर हाईड्रेंट दबने के कारण कहीं नजर नहीं आते। दमकल की गाड़ियों में पानी के लिए पालिका के नलकूपों पर फिलिंच लगाए गए है। अगर कहीं पर आग लग जाए तो नलकूप से पानी लाने में बहुत समय लगता है। अगर उस समय बिजली न हो तो पानी नहीं मिलेगा। दमकल की गाड़ियों में शुगर मिल से पानी भरा जाता है।
संकरी गलियों में आग बुझाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं
शहर में कई स्थानों पर संकरी और तंग गलियां है, जहां पर दमकल की बड़ी गाड़ी तो क्या छोटी गाड़ी का भी पहुंचना मुश्किल है। शहर में बड़ा बाजार हलवाई हट्टा, अजुध्या चौक से जैन मोहल्ला जाने वाली गली, शिव मूर्ति बड़ी आल, ब्राह्मणान, लाजपत राय, दयानंदनगर की अधिकतर गलियां, हाजीपुरा आदि अनेक मोहल्ले ऐसे हैं, जहां पर दमकल की गाड़ी नहीं पहुंच सकती। ऐसे में अगर इन गलियों में आग लगने की घटना हो जाए तो दमकल विभाग विकल्प तलाशता रह जाता है। दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तंग गलियों के लिए दो छोटी गाड़ी है। इनसे पाइप जोड़कर पानी पहुंचाया जाता है। अधिकतम करीब 150 मीटर पाइप तक ही पानी का प्रेशर रहता है। कई मोहल्ले ऐसे है जहां पर छोटी गाड़ी भी नहीं जा सकती।
दो की जगह एक नई गाड़ी मिली
दमकल विभाग के पास एक 1983 और दूसरी 1997 मॉडल गाड़ी थी। कोरोना संक्रमण काल शुरू होने पर सैनिटाइजेशन के लिए शासन से छह हजार लीटर पानी क्षमता की बड़ी गाड़ी मिली। इसके बाद दोनों पुरानी गाड़ियों को निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया गया। अभी तक दूसरी बड़ी गाड़ी विभाग को नहीं मिली है। एक बड़ी गाड़ी ऊन तहसील में रहती थी।
कोट
जिले में उपलब्ध संसाधनों से जल्द से जल्द आग बुझाने की कार्रवाई की जाती है। तंग गलियों में छोटी गाड़ी ले जाकर और पाइप जोड़कर आग बुझाई जाती है। दीपावली के त्योहार पर आग से बचाव से सभी तरह की तैयारियां की गई है।
- दीपक शर्मा, सीएफओ।