शामली। जिले में खरीफ सीजन के दौरान यूरिया खाद की किल्लत गहराने लगी है। शामली, कैराना, बिडौली और चौसाना क्षेत्र की कई सहकारी समितियों पर या तो यूरिया का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है या फिर नाममात्र का बचा है। धान, गन्ना और ज्वार की फसलों में इस समय यूरिया की सबसे अधिक आवश्यकता है, लेकिन किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल रही। कई किसान कई दिनों से समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, जबकि ठेके पर खेती करने वाले किसानों को नियमों के चलते यूरिया से वंचित रहना पड़ रहा है। सोमवार को पड़ताल के दौरान जिलेभर में इस तरह का नजारा मिला।
गोदाम पर ताला, कई दिन से नहीं यूरिया और डीएपी
गन्ना समिति शामली स्थित सहकारी समिति पर पिछले कई दिन से यूरिया व डीएपी नहीं है। प्रभारी संजय सैनी ने बताया कि अभी यूरिया आने की कोई उम्मीद नहीं है। शहर के माजरा रोड स्थित इफको केंद्र पर भी कई दिन से किसानों को यूरिया नहीं मिल रहा है। मौके पर गोदाम पर ताला लटका मिला। वहां मिले कर्मचारी ने बताया कि शुक्रवार को ही यूरिया व डीएपी समाप्त हो चुकी थी, मंगलवार को आने की पूरी उम्मीद है।
आठ दिन से खाली मलकपुर समिति
कैराना क्षेत्र में मलकपुर सहकारी समिति पर पिछले आठ दिन से यूरिया उपलब्ध नहीं है। भूरा समिति पर भी सीमित स्टॉक होने के कारण किसानों को आवश्यकता से कम खाद दी जा रही है। ऊंचागांव समिति पर भी तीन दिन से यूरिया खत्म है। इससे धान की फसल की पहली टॉप ड्रेसिंग प्रभावित हो रही है।
भूरा निवासी किसान तसव्वर ने बताया कि यूरिया नहीं मिलने से उन्हें बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। मलकपुर निवासी मनोज सैनी ने कहा कि वह पिछले आठ दिन से समिति के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन यूरिया नहीं मिला। किसान सलेक का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने से धान की फसल प्रभावित हो रही है।
ठेका किसानों के लिए बढ़ी परेशानी
वेदखेड़ी लक्ष्मणपुर बी-पैक्स समिति में दो दिन पहले आई यूरिया की खेप पूरी तरह वितरित हो चुकी है। समिति के एमडी अशोक कुमार ने बताया कि फिलहाल डीएपी उपलब्ध है और उसका वितरण किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि समिति में केवल उन्हीं किसानों को यूरिया मिल रही है, जिनके नाम पर भूमि दर्ज है। ठेके पर खेती करने वाले किसान खाद नहीं मिलने से खुले बाजार पर निर्भर हैं, जहां उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
स्टॉक घटकर 40 कट्टे
चौसाना सहकारी समिति में सोमवार को यूरिया का स्टॉक घटकर मात्र 40 कट्टे रह गया। हालांकि डीएपी के करीब 200 कट्टे उपलब्ध हैं। किसानों का कहना है कि धान, गन्ना और ज्वार की फसलों के लिए इस समय यूरिया की सबसे अधिक जरूरत है। सीमित स्टॉक के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। समिति कर्मचारी विकास कुमार ने बताया कि यूरिया की दूसरी खेप की रैक लग चुकी है और जल्द ही पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध करा दी जाएगी।
जल्द पहुंचेगी नई खेप
एडीओ (सहकारिता) मुकेश कुमार ने बताया कि नई रैक मिलने की प्रक्रिया जारी है और उपलब्ध होते ही सभी समितियों पर मांग के अनुसार यूरिया पहुंचा दी जाएगी।