बिजनौर। जिले में वन क्षेत्रों से लगे 22 गांव जहां बाघों के लिए संवेदनशील है, वहीं 110 से ज्यादा गांव में गुलदार का खतरा सता रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वह डरावने हैं। पिछले ढाई साल में 32 लोग गुलदार के हमले में मारे जा चुके हैं, वहीं घायलों की संख्या 100 से ज्यादा पहुंच चुकी है। रैंकिग की बात करें तो हमलों को देखते हुए अफजलगढ़ ब्लॉक को संवेदनशीलता के मामले में पहले नंबर पर रखा गया है।
पांच साल पहले तक घने जंगल में रहने वाला गुलदार अब जिले के गन्ने के खेतों में पहुंच गया। पिछले तीन साल में जिले में 80 से ज्यादा गुलदार पकड़े जा चुके हैं। वहीं 30 से ज्यादा गुलदार की मौत हादसे या बीमारी के कारण हुई है। वहीं हमलों की बात करें तो ढ़ाई साल में 32 इंसानों ने जान गवांई है। वन विभाग पिछले डेढ़ साल से गुलदार की मौजूदगी और हमलों को लेकर संवेदनशील गांवों की लिस्ट बना रहा है। जो अब 110 गांव का आंकड़ा पार कर चुकी है। सबसे ज्यादा अफजलगढ़ को संवेदनशील माना गया है।
डीएफओ कार्यालय में बृहस्पतिवार को गुलदार नियंत्रण को लेकर बैठक हुई। जिसमें सभी रेंजर को उनके क्षेत्र के संवेदनशील गांवों के बारे में बताया। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने पर जोर दिया। इसके अलावा डीएफओ ने कहा कि सभी रेंजर अपने क्षेत्र में होने वाली वन्य जीव संघर्ष की जानकारी तुंरत उच्चाधिकारियों को देंगे। साथ ही वन्य जीवों के पग चिन्ह भी देखने के बारे में बताया।