बढ़ापुर। तंगहाली में दिन काट रहे परवीन सिंह (50) की मौत ने उसे अपने इकलौते बेटे राजू (13) से जुदा कर दिया। राजू के परिवार में अब कोई नहीं बचा है। आठ माह पहले ताऊ, उसके बाद दादी और अब पिता की मौत से वह गुमसुम है। मोहल्लेवासियों ने चंदा इकट्ठा कर पिता का तो अंतिम संस्कार करा दिया लेकिन अब राजू के भविष्य पर सवाल है।
मोहल्ला सत्तीयान में परवीन सिंह अपने बेटे राजू के साथ टूटे छप्पर पर पन्नी डालकर रह रहा था। परवीन सिंह की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। मोहल्ले व आसपास में थोड़ा-बहुत काम के बदले में जो मिल जाता उसी से पिता-पुत्र का गुजारा हो रहा था। कुछ दिन पहले बीमारी के चलते परवीन सिंह ने बिस्तर पकड़ लिया। मोहल्लेवाले उनकी भोजन आदि से मदद कर देते थे। पर्याप्त उपचार नहीं मिलने के कारण बृहस्पतिवार की शाम परवीन की मौत हो गई।
राजू की मां सोनिया की मौत करीब 12 साल पहले हो गई थी। ताऊ और दादी के बाद पिता की मौत से अब उसके परिवार में कोई भी ऐसा नहीं जो उसे सहारा दे सके। पिता का साया उठ जाने पर राजू की आंखों से आंसू फूट पड़े। उसके भविष्य की चिंता से मोहल्लेवासियों की आंखें भी नम हो गईं। मोहल्लेवासियों की मदद से राजू ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया।
- नहीं मिल सका एक अदद आवास
बढ़ापुर। मोहल्लेवासी वीरेंद्र सैनी, मनोज कुमार, धर्मपाल सिंह, राजू पाल व सतेंद्र कुमार का कहना है कि परवीन बेहद तंगहाली में जीवन यापन कर रहा था। घर के नाम पर एक पन्नी पड़ा हुआ छप्पर है। वह काफी समय से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनवाने के लिए प्रयास कर रहा था लेकिन उसे इस योजना का लाभ नहीं मिल सका।