शामली। फास्ट फूड और जंक फूड लोगों को एनीमिया का शिकार बना रहा है। जिला अस्पताल में हर महीने 60-70 मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सक दवा के साथ बचाव की सलाह दे रहे हैं।
जिला अस्पताल में हर आयु वर्ग के एनीमिया से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। फिजिशियन डॉ. सचिन मलिक ने बताया कि रोजाना तीन-चार मरीज रक्त की कमी वाले आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे होते हैं जो बाजार में बने खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन करते हैं। बाजार के खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की कमी के कारण शरीर में रक्त की कमी होती है। इसके अलावा कुछ लोगों में आनुवंशिक होता है, तो कुछ में बी-12 की कमी होना या मलेरिया के संक्रमण के कारण भी एनीमिया की समस्या बनती है।
सात से कम हीमोग्लोबीन होने पर रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। सात से 11 के बीच हीमोग्लोबीन होने पर आयरन की गोली व विटामिन बी-12 दिया जाता है। एनीमिया से बचाव के लिए पौष्टिक भोजन लेना चाहिए। हरे पत्तेदार सब्जियां और घर पर बने खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए और चिकित्सक की सलाह से दवा लेनी चाहिए।
लक्षण :
- अत्यधिक थकान व कमजोरी होना
- त्वचा का पीला पड़ना
- सांस फूलना, चक्कर आना
- ठंडे हाथ-पैर और सीने में दर्द होना।
- सिरदर्द, धड़कन तेज होना।
हीमोग्लोबीन (ग्राम प्रति डेसीलीटर)
11 से 14 -सामान्य
9 से 11 - माइल्ड मामूली कम
7 से 9 - मध्यम
7 से कम - गंभीर
इस तरह से आ रहे केस
केस एक : कैराना निवासी 40 वर्षीय शबनम ने बताया कि उसे चक्कर आ रहे थे और कमजोरी महसूस दे रही थी। चिकित्सक ने जांच कराई तो रक्त की कमी बताई गई, जिसकी दवा दी है।
केस दो : शामली निवासी 22 वर्षीय रोहन ने बताया कि उसकी त्वचा का रंग पीला सा दिखाई दिया। जांच कराई तो हीमोग्लोबीन 9 मिला। चिकित्सक ने दवा दी है।