शामली। कृषि विभाग की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन पर जनपद स्तरीय गोष्ठी और किसान प्रदर्शनी में सीडीओ शंभूनाथ तिवारी ने कहा कि किसान पराली और गन्ने की पत्ती ना जलाएं। किसान पराली, पत्ती के समाधान हेतु कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे फार्म मशीनरी यंत्रों के माध्यम से समाधान कराएं।
बृहस्पतिवार को शहर के दिल्ली रोड स्थित सिटी ग्रीन में गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि सीडीओ शंभू नाथ तिवारी ने दीप प्रज्वलित करके किया। उन्होंने कहा कि किसान पानी का दोहन न करें। सार्वजनिक स्थानों पर गोबर आदि का जमावड़ा ना करें। खेत में एक गड्ढा बनाकर उसमें गोबर डालें और उसका कंपोस्ट खाद के रूप में खेत में इस्तेमाल करें। किसानों से फसल चक्र अपनाने और तकनीकी विधि से खेती करने पर जोर दिया। उन्होंने तीन किसानों को फार्म मशीनरी की चाबी सौंपी।
25 किसानों को वेस्ट डी कंपोस्ट किट, 10 किसानों को ट्राइकोडरमा, पांच किसानों को सरसों मिनी किट उपलब्ध कराई गई। गोष्ठी में आईएआरआई पूसा नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वाई वी सिंह ने माइक्रो बायोलॉजी डी कंपोजर द्वारा पूसा कैप्सूल पर किसानों के साथ चर्चा की। कहा कि पराली पत्ती जलाने से खेत के पोषक तत्व खत्म होते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र शामली के वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक सहफसली खेती और गेहूं की अगेती-पछैती फसल के बारे में समझाया। मौके पर कृषि-पशुपालन, उद्यान विभाग द्वारा प्रदर्शनी आयोजित की गई। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी लगाई गई। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी यशवंत सिंह, शामली कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी सतीश कुमार, उपनिदेशक कृषि शिवकुमार केसरी, जिला कृषि अधिकारी डाक्टर हरीशंकर सिंह, जिला कृषिरक्षा अधिकारी विकास कुमार, उपसंभागीय अधिकारी डाक्टर अमित कुमार आदि मौजूद रहे। भूमि संरक्षण अधिकारी नीरजा सिंह ने संचालन किया।