शामली। करीब आठ घंटे तक किसानों द्वारा मिल बंद कराए जाने के बाद प्रबंधन बैक फुट पर आ गया। किसानों के धरने के आगे झुके मिल प्रबंधन ने सभी मांगों पर सहमति दे दी, जिसके बाद रात करीब 11 बजे मिल चालू हुई। इस दौरान शहर में गन्ने की बोगियों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां से जाम लग गया था।
प्रदेश सरकार द्वारा घोषित गन्ना मूल्य पर्चियों पर अंकित नहीं होने और बकाया भुगतान नहीं होने से गुस्साए किसानों ने शनिवार को शामली शुगर मिल में तौल बंद करा दिया था और धरने पर बैठ गए। तौल बंद होने से गन्ने से लदे वाहनों की वजह से शिव चौक, फुव्वारा चौक तक जाम लग गया था। किसानों की 12 फरवरी तक पुराना और 18 दिसंबर तक का चालू पेराई सत्र का भुगतान एवं गन्ना पर्चियों पर घोषित मूल्य अंकित करने की मांग थी। इस संबंध में मिल प्रबंधन से दो बार वार्ता हुई, लेकिन मिल अधिकारियों ने किसानों की मांग पूरी करने में असमर्थता जता दी। जिससे किसानों ने बेमियादी धरना शुरू कर दिया।
मिल बंद होने और गन्ने के वाहनों की लाइन लगने से पुलिस प्रशासन और मिल अधिकारियों में हड़कंप मच गया। देर रात करीब 11 बजे मिल अधिकारी किसानों के पास पहुंचे और सोमवार से पर्चियों पर गन्ना मूल्य अंकित किए जाने एवं 12 फरवरी तक भुगतान कराए जाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद किसान धरने से हटे और मिल चालू हुई।
शामली शुगर मिल के सहायक गन्ना महाप्रबंधक नरेश कुमार ने बताया कि रात में ही किसानों के साथ वार्ता हुई थी। इसमें किसानों की रिजेक्ट वैरायटी को सामान्य में लिए जाने की मांग को अस्वीकार कर दिया गया। जबकि अन्य सभी मांगे मान ली गई हैं। रात में ही मिल चालू करा दिया गया था।