शामली। परंपरागत कच्ची नालियों से पानी ले जाने के झंझट से अब किसान मुक्ति पा रहे हैं। अब खेतों में भूमिगत पाइपलाइन न केवल पानी की बर्बादी रुकी है, बल्कि समय और मेहनत की भी भारी बचत हो रही है। इस आधुनिक तकनीक से किसानों की खेती न केवल आसान हुई है, बल्कि फसलों की पैदावार में भी सुधार देखने को मिल रहा है। जनपद के गांव कुड़ाना, बनत, भैंसवाल, बहावड़ी, काबड़ौत आदि गांव में काफी किसानों ने सरकार द्वारा पाइपलाइन में मिलने वाली सब्सिडी का लाभ लेकर पाइपलाइन दबाई है। जिस खेत में पहले पानी पहुंचने में घंटों लग जाता था, वहां अब पाइपलाइन में ट्यूबवेल चलाते ही मिनट से पहले खेत में पानी आना शुरू हो जाता है।
किसानों की जुबानी
-गांव कुड़ाना के किसान नीरज ने बताया कि उसने 1000 फुट पाइपलाइन लगाई है। पहले नाली से पानी खेत में लाते समय पानी रास्ते में ही सूख जाता था या मिट्टी सोख लेती थी। अब पाइपलाइन से पानी सीधे अंतिम कोने तक पहुंचता है, जिससे आधे समय में सिंचाई हो जाती है।
-किसान गौरव ने बताया कि उसका एक खेत 500 मीटर दूर था, उसके लिए उसने पाइपलाइन डालकर एक ट्यूबवेल से ही काम चला रहा है। जमीन में पाइप डलवाने से चकरोड (रास्ता) भी साफ रहता है। अब नाली टूटने या पानी बर्बाद होने का डर नहीं रहता। पाइपलाइन ने पानी का शत-प्रतिशत सदुपयोग करना सिखा दिया है।
-किसान मित्तल ने बताया कि सरकार द्वारा पाइपलाइन पर मिलने वाली सब्सिडी ने भी इस तकनीक को अपनाने में मदद की है। सरकार द्वारा 4 इंची पाइपलाइन दबवाई जाती है, जिसकी ट्यूबवैल का पानी अधिक है, वह खुद के पैसे से प्राइवेट कंपनी द्वारा पांच या छह इंची पाइपलाइन दबवा रहे हैं।
-पाइपलाइन के प्रमुख लाभ
जिला कृषि अधिकारी प्रदीप यादव के अनुसार
-पानी की बचत : 30-40% पानी वाष्पीकरण और रिसाव से बचता है।
-समय की बचत : सीधा पानी खेत तक, नाली बनाने का झंझट खत्म।
-उपजाऊ जमीन की बचत : नालियों में बेकार जाने वाली जमीन अब खेती के काम आ रही है।
योजना का किसान ले रहें लाभ
कृषि अधिकारी के अनुसार ब्लॉक स्तर पर कृषि विभाग और राज्य सरकारों द्वारा खेतों में भूमिगत पाइपलाइन दबवाने की योजना से किसानों को सिंचाई में बड़ी राहत मिल रही है और वे आर्थिक रूप से संपन्न हो रहे हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सिंचाई के दौरान पानी की बर्बादी को रोकना और पानी को सीधे स्रोत खेत तक पहुंचाना है। सरकार द्वारा एचडीपीई और पीवीसी पाइपों पर 50 से 60 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।