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लाल सड़न रोग पर सर्वे से बाहर हो सकता है खेत

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शामली। गन्ने की फसल में लाल सड़न रोग लगा है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दें। अगले वर्ष उस खेत में गन्ने की फसल की बुवाई ना करें। यदि इस ऐसे खेत में गन्ना उगाया गया तो उसे सर्वे में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा इस फसल की आपूर्ति ना चीनी मिलों को कराई जाएगी। जिले में 0238 गन्ने की प्रजाति का रकबा 90 प्रतिशत से ज्यादा है। इस प्रजाति में लाल सड़न रोग लग रहा है।
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जिला गन्ना अधिकारी विजय बहादुर सिंह ने बताया कि गन्ने के लाल सड़न रोग से लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, अयोध्या, आंबेडकर नगर, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, बस्ती, महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया एवं आजमगढ़ जिले ज्यादा प्रभावित हैं। निर्देश जारी किए गए हैं कि जिन क्षेत्रों में लाल सड़न रोग से गन्ने की फसल 20 प्रतिशत से अधिक प्रभावित है, उसकी तुरंत कटाई कर चीनी मिल को सप्लाई कर दें।
खाली खेत के ठूंठों को जला दें और खेत की जुताई करके दूसरी फसल की बुवाई करें। अगले एक वर्ष तक उस खेत में गन्ने की फसल न उगाएं। 20 प्रतिशत से कम फसल प्रभावित होने पर जड़ सहित उखाड़कर जला दें और उस स्थान पर ब्लीचिंग पाउडर डालकर मिला दें। शेष खड़ी फसल में सिस्टमिक फंजीसाइड जैसे कार्बेंडाजिम, थियोफिनेटमिथाइल या हेक्साटाप का प्रत्येक माह छिड़काव करें तथा जैव पेस्टीसाइड ट्राइकोडर्मा 10 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में उपयोग करें।
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उपचारित करें और दूसरी प्रजातियों की करें बुवाई
लाल सड़न रोकने के लिए बीज का 0.1 प्रतिशत कार्बेंडाजिम, थियोफिनेटमिथाइल या हॉट वाटर ट्रीटमेंट विधि से उपचार कर बुवाई करें। गन्ने की 0238 प्रजाति के स्थान पर दूसरी किस्मों का चयन करें। इस प्रजाति का क्षेत्रफल अधिकतम 25 प्रतिशत तक रखें। गन्ने की को. 0118, कोशा 13235, को.लख. 14201, को.शा. 8272, को.लख. 94184, को. 98014 आदि किस्मों का उपयोग करें।
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