सऊदी अरब गए तस्लीम आलम के चाचा मोबिन आलम परिवार सहित फोन पर उसका हालचाल लेते हुआ। परिजन
शामली/झिंझाना। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बने युद्ध जैसे हालातों के कारण दुबई ओर खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय मूल लोगों के परिजन चिंतित हैं। परिजन वहां रह रहे लोगों से लगातार संपर्क में हैं और उनके कुशलक्षेम की जानकारी ले रहे हैं। शामली के मोहल्ला कबाड़ी बाजार निवासी अदनान पिछले करीब सात साल से दुबई में रहते हैं। अदनान के पिता जमीर अहमद ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे से फोन पर बातचीत की। फोन पर उसने बताया कि जहां पर वे रह रहे हैं, उस क्षेत्र में आसमान से मिसाइलें जा रही है, जिससे वहां के लोगों में दहशत बनी है, लेकिन वे पूरी तरह सुरक्षित है। झिंझाना निवासी खुर्शीद आलम ने बताया कि उनका बेटा तस्लीम आलम जेद्दा से करीब 500 किलोमीटर दूर हाइल शहर में नौकरी करता है। उन्होंने फोन पर तस्लीम से बातचीत कर हालचाल लिया। तस्लीम ने बताया कि इस समय माहौल पूरी तरह शांत है। लोग अपने कारोबार और कामकाज में व्यस्त हैं।
मोहल्ला पठानान निवासी शेर अफगान ने बताया कि उनका पुत्र ओसामा खान पिछले करीब छह वर्षों से सऊदी अरब की राजधानी रियाद में नौकरी कर रहा है। रविवार सुबह ओसामा से फोन पर बातचीत होने के बाद स्थिति स्पष्ट हुई। ओसामा ने परिजनों को बताया कि अमेरिकी एयर बेस रियाद शहर से काफी दूरी पर स्थित है और वहां फिलहाल सामान्य स्थिति बनी हुई है। शहर में रोजमर्रा की गतिविधियां पहले की तरह बनी हैं। nईरान से आने वाले मोम पर संकट : अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बने युद्ध के हालातों का असर कारोबार पर भी पड़ रहा है। जिले के उद्यमी अनुज गर्ग ने बताया कि माचिस बनाने के लिए ईरान से माेम मंगाया जाता है। पहले मोम 80 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रहा था, लेकिन अब उसके दाम बढ़कर 110 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं। इससे माचिस बनाने में आने वाली लागत बढ़ गई है।