शामली। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामली में नेत्र सर्जन की तैनाती है, लेकिन मोतियाबिंद के ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। इसकी वजह है कि सात माह पहले ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप मशीन निष्प्रयोज्य घोषित हो चुकी है और शासन से कई बार मांग के बाद भी नई मशीन नहीं मिली है। ऑपरेशन के लिए मरीज मेरठ व मुजफ्फरनगर रेफर किए जाते हैं, जिससे उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
सीएचसी शामली में पिछले कई साल से मरीजों को मोतियाबिंद के नि:शुल्क ऑपरेशन व उपचार की सुविधा मिलने से काफी राहत महसूस करते थे। एक दिन में 10 से 15 मोतियाबिंद के ऑपरेशन यानि औसतन हर महीने लगभग 150 ऑपरेशन हो रहे थे। करीब सात महीने पहले ऑपरेटिव माइक्रोस्कोप मशीन खराब हो गई थी। अधिकृत कंपनी के अधिकारियों ने सीएचसी पहुंचकर मशीन की जांच की तो उन्होंने उसे निष्प्रयोज्य (कंडम) घोषित कर दिया। इसके बाद शासन को कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अभी नई मशीन नहीं मिली है।
यूपी में लगातार तीन साल पहले नंबर पर रहा शामली
नेत्र सर्जन डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि 2012 में वे बागपत से स्थानांतरित होकर सीएचसी शामली में आए थे। तब उन्होंने मशीन की व्यवस्था कराई थी। उसके बाद से वे लगातार आंखों के ऑपरेशन कर रहे हैं। कोरोना से पहले मोतियाबिंद के ऑपरेशन करने में शामली प्रदेश में लगातार तीन साल तक पहले नंबर पर रहा है। एक दिन में 27 ऑपरेशन तक किए गए। नेत्र परीक्षण अधिकारी डॉ. राजकुमार का कहना है कि एक दिन में 120 से 150 मरीज आंखों की जांच कराने पहुंचते हैं।
जिला अस्पताल में भी नहीं ऑपरेशन की सुविधा
जिला अस्पताल में दो नेत्र सर्जन की नियुक्ति है, लेकिन मशीन न होने के कारण यहां भी ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। इसके अलावा सीएमओ कार्यालय में एसीएमओ डॉ. विनोद कुमार भी नेत्र सर्जन है। इस तरह से जिले में चार नेत्र सर्जन की नियुक्ति है, लेकिन मशीन न होने से ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल रही है।
दस बार पत्र भेजकर की जा चुकी मांग
सीएचसी के नेत्र सर्जन डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि अपर निदेशक स्वास्थ्य लखनऊ, डीएम शामली, सीएमओ आदि अधिकारियों को दस से ज्यादा पत्र लिखकर मशीन की मांग की जा चुकी है, लेकिन शासन स्तर से अभी मशीन नहीं मिली है।