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Shamli News: हर महीने दो हजार लोग हो रहे कुत्ते और बंदरों के हमले का शिकार

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जलालाबाद में कुत्तो के हमले में घायल बच्ची । संवाद
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शामली। थानाभवन में मासूम बच्ची पर हमला कर कुत्तों के झुंड ने घायल कर दिया। जिले में कुत्ते और बंदरों के आतंक बढ़ रहा है। जिला अस्पताल व जिले की सभी सीएचसी पर एक महीने में करीब साढ़े हजार लोग एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें नए मरीजों की संख्या करीब दो हजार है।
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सड़कों व गलियों में आवारा कुत्ते झुंड में घूमते रहते हैं, जो आते-जाते लोगों, बच्चों और महिलाओं पर हमला कर घायल कर रहे हैं। सीएचसी शामली में ओपीडी में रोजाना करीब 40- 50 मरीजों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं जबकि जिला अस्पताल में 25 से 30 मरीजों को एंटी रेबीज के इंजेक्शन लग रहे हैं।
झिंझाना सीएचसी पर फार्मासिस्ट देवेंद्र कुमार ने बताया कि एंटी रेबीज इंजेक्शन रविवार छोड़कर अन्य सभी दिन लगाए जाते हैं। शनिवार को 10 मरीजों को एंटीरेबीज की डोज लगाई गई है। मई में अब तक 180 लोगों को एंटी रेबीज की डोज लग चुकी है।
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कांधला सीएचसी पर एंटीरेबीज के इंजेक्शन रोज लगाए जाते हैं। पहले सोमवार और बृहस्पतिवार को लगाए जाते थे। शनिवार को एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवाने के आठ मरीज पहुंचे। कस्बा निवासी आरिफ जंग ने बताया कि सीएचसी पर एंटी रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध है। डॉक्टर वीरेंद्र सिंह ने बताया कि हर महीने 250 से 300 मरीजों को एंटी रेबीज के इंजेक्शन लग रहे हैं।
बाबरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध हैं। फार्मासिस्ट नितिन त्यागी ने बताया कि एंटी रेबीज के इंजेक्शन पिछले महीने सात-आठ लोगों को और इस महीने में अब तक चार लोगों को लग चुके हैं।
ऊन सीएचसी पर फार्मासिस्ट मनोज शर्मा ने बताया कि रविवार छोड़कर अन्य सभी दिन एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगाने की व्यवस्था है। शनिवार को ममता, सरोज, ओमबीर,वंशिका समेत 22 लोगों को एंटी रेबीज की डोज लग चुकी है। मई में 410 लोगों को एंटी रेबीज की डोज लगाई गई है।
कैराना सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर शैलेंद्र चौरसिया ने बताया कि अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन हर समय उपलब्ध है। इमरजेंसी में रोज एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं। एक दिन में कुत्ते काटने के 30 से 40 मरीज अस्पताल में आते हैं।
- जिले में सीरम की डोज लगाने की नहीं व्यवस्था
कुत्ते व बंदर यदि किसी मरीज को सिर, गर्दन या सीने पर काटकर गंभीर घायल कर देते हैं तो उन्हें सीरम इंजेक्शन की जरूरत होती है। जिला अस्पताल व सीएचसी में सीरम उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को हायर सेंटर मेरठ या दिल्ली रेफर किया जाता है।
- नगर निकायों में कुत्तों को पकड़ने की व्यवस्था नहीं
नगरपालिका व नगर पंचायतों में आवारा कुत्तों को पकड़कर सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण आवारा कुत्तों के झुंड सड़कों से लेकर गलियों में घूमते रहते हैं और आते जाते लोगों पर हमला कर रहे हैं। पालिका में पालतू कुत्तों के पंजीकरण की भी व्यवस्था नहीं है।
- कोट
जिले की सभी सीएचसी और जिला अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। कुत्ते या बंदर के काटने पर अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना चाहिए। अस्पतालों में ये इंजेक्शन निशुल्क लगाए जाते हैं। - डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ।
- रेबीज से मौत होने पर पालिका ईओ पर लग चुका है एक लाख रुपये जुर्माना
कांधला के मोहल्ला जाट काॅलोनी निवासी राजबीरी ने 22 फरवरी 2018 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में दायर कराए परिवाद में बताया कि उनके पति प्रमोद कुमार को 27 जनवरी 2016 को पागल कुत्ते ने काट लिया था। सरकारी अस्पताल कांधला में डाक्टर के परामर्श के अनुसार नियमानुसार इंजेक्शन लगवाकर उपचार कराया। हालत बिगड़ने पर दिल्ली अस्पताल में भर्ती कराया, जहां 19 फरवरी 2016 को उनके पति की मृत्यु हो गई। इस मामले में आयोग ने कांधला नगरपालिका पर सेवा में कमी और घोर लापरवाही एवं उपेक्षा करने के लिए पालिका के अधिशासी अधिकारी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित करने का आदेश सुनाया गया था।
- दिल्ली में उपचार के बाद घर पहुंची बच्ची को तेज बुखार
थानाभवन /जलालाबाद। जलालाबाद के मोहल्ला आर्यनगर निवासी इमरान की तीन साल की पुत्री जूबी को कुत्तों ने हमला कर गंभीर घायल कर दिया था। प्राथमिक उपचार के बाद दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल ले जाया गया था। वहां पर बच्ची के सिर में करीब 25 टांके लगाए गए और विशेष टीका लगाकर उपचार दिया गया। शनिवार को परिजन बच्ची को लेकर घर आ गए। परिजनों ने बताया कि एक सप्ताह में बच्ची को दोबारा लाने के लिए कहा गया है। परिजनों ने बताया कि बच्ची को तभी से तेज बुखार आ रहा है। उधर, लोगों ने कस्बे में कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है। नगर पंचायत के ईओ ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 2022 का हवाला देते हुए कहा कि कुत्तों को पकड़वाया नहीं जा सकता है। उनका बधियाकरण कराया जा सकता है।
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