बुढ़ापे में मिलने वाली पेंशन के लिए बुजुर्ग दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि विभागीय सत्यापन में करीब 400 मृत लाभार्थियों के खातों में भी पेंशन जाने का मामला सामने आया है। अब मृतकों की पेंशन तो रोक दी गई, लेकिन जिंदा बुजुर्गों को अब भी अपनी रकम का इंतजार है। पेंशन न मिलने से कई बुजुर्ग आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं।
राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत जिले में 42,417 बुजुर्ग पेंशन धारक हैं। इनमें से 18,359 को ही पेंशन मिल सकी है, जबकि 24,058 पेंशनधारकों को पिछले आठ माह से रकम नहीं मिली है।
पेंशन के लिए बुजुर्ग समाज कल्याण विभाग और विकास भवन के चक्कर काट रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार पेंशन की धनराशि जारी कराने के लिए शासन को दस से अधिक पत्र भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पेंशनधारकों को रकम नहीं मिल सकी है।
सत्यापन में मृत मिले लाभार्थी
करीब तीन माह पहले विभाग ने पेंशनधारकों का सत्यापन कराया था। इसमें करीब 400 ऐसे लाभार्थी मिले, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनके खातों में पेंशन की रकम जा रही थी। इनमें लीलौन के रामबीर, खेड़ी के बाबूराम, राजेंद्र और सोहन समेत अन्य लाभार्थी शामिल बताए गए। सत्यापन के बाद इनकी पेंशन रोक दी गई।
दस बार विकास भवन के चक्कर काट चुके सादिक
झिंझाना के मोहल्ला शाह मुबारिक निवासी सादिक ने बताया कि जनवरी के बाद से पेंशन नहीं मिली है। वह विकास भवन के दस से अधिक चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
छह बार कार्यालय पहुंचीं कला
सेहटा गांव निवासी कला ने बताया कि पहले पेंशन समय से मिलती थी, लेकिन जनवरी से रकम बंद है। वह समाज कल्याण विभाग के कार्यालय के छह चक्कर लगा चुकी हैं। हर बार जल्द पेंशन आने का आश्वासन दिया जाता है।
शिकायत के बावजूद समाधान नहीं
सेहटा निवासी राम कटोरी ने बताया कि लंबे समय से पेंशन नहीं मिली है। आर्थिक परेशानी के चलते घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। वहीं, संतोष ने भी कई बार शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं होने की बात कही।
जिलाधिकारी आलोक यादव ने बताया कि पेंशन के लिए फिर से पत्र भिजवाया जाएगा। सभी पात्रों को पेंशन का लाभ दिलवाया जाएगा।