सुरेश देवी। उनके बेटे भूपेंद्र और पोते अर्जुन की फाइल फोटो।
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जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी संजय चौहान, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सतेंद्र धिरियान, ब्रह्मपाल सिंह ने बताया कि मेरठ के कंकरखेड़ा स्थित सैनिक विहार कॉलोनी निवासी सुरेश देवी ने 6 अप्रैल 2022 की रात कांधला थाने पर एफआईआर दर्ज कराई थी। बताया था कि यूपी पुलिस से बर्खास्त सिपाही विक्रांत निवासी मखमूलपुर, थाना कांधला से उनके बेटे भूपेंद्र ने दो लाख रुपये लिए थे। 50 हजार रुपये लौटा दिए थे, मगर विक्रांत ने 5.80 लाख रुपये की मांग की थी।
पांच अप्रैल 2022 को भूपेंद्र और उनकी मां सुरेश देवी को विक्रांत ने अपने गांव मखमूलपुर बुलाया था, जहां विक्रांत और उसके परिवार के लोगों ने भूपेंद्र और उसकी मां सुरेश देवी की पिटाई की। अगले दिन भूपेंद्र के इकलौते बेटे अर्जुन को भी मखमूलपुर बुला लिया गया। इसके बाद सुरेश देवी को पैसे लाने के लिए भेजा था, जबकि भूपेंद्र और उसके बेटे अर्जुन को बंधक बनाकर यातनाएं दी थीं।
सुरेश देवी ने अपने बेटे और पोते को बचाने के लिए डायल-112 पुलिस को मौके पर बुला लिया था, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में ही आरोपी घायल भूपेंद्र और उनके बेटे अर्जुन को जबरदस्ती गाड़ी में डालकर ले गए थे। डायल-112 पुलिस को कहा था कि इन्हें थाने लेकर जा रहे हैं। बाद में आरोपियों ने पिता-पुत्र को सल्फा के जंगल में ले जाकर गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद सुरेश देवी ने कांधला थाने पर मुकदमा दर्ज कराया था।
29 जून 2022 को कांधला पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित कर दिए थे। करीब चार साल की कानूनी लड़ाई के बाद हत्या की चश्मदीद गवाह और मुकदमे की वादी मृतक भूपेंद्र की मां सुरेश देवी को न्याय मिल गया। 13 अगस्त को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार राय ने पिता-पुत्र की हत्या में बर्खास्त सिपाही विक्रांत, उसके भाई अर्जुन, पिता वीरेंद्र और मोनू को हत्या का दोषी करार दिया था। सोमवार को तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि वीरेंद्र को पांच साल की सजा दी।
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