समय : सुबह 10:30 बजे
स्थान : कस्बे के सामुदायिक चिकित्सालय का परिसर
आयोजन : स्वास्थ्य विभाग का ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य मेला
स्वास्थ्य मेले में विभिन्न बीमारियों के उपचार, सुझाव व लोगों को जागरूक करने के लिए जिले के 20 विभागों के अधिकारियों को आमंत्रित किया गया था। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस मेले का लाभ उठाने को करीब एक हजार लोगों ने पहुंचकर पंजीकरण भी कराया, लेकिन हैरत की बात ये है कि पहले तो मेले में अपनी जिम्मेदारी संभालने को लगभग आधे विभागों ने उपस्थिति ही दर्ज नहीं कराई।
ऊपर से जो अधिकारी मेले में पहुंचे भी तो वह भी साढ़े बारह बजते-बजते अपना बोरिया-बिस्तर उठाकर घर को चलते बने। इसी का परिणाम है कि 12:30 बजे तक मेले में एकाध डॉक्टर या अधिकारी-कर्मचारी ही मौजूद मिले। अब इसे औपचारिकताओं का मेला न कहें तो और क्या कहें।
मंत्री के भतीजे ने किया शुभारंभ
चिकित्सालय परिसर में शनिवार को पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा के भतीजे अर्जुन राणा व ब्लॉक प्रमुख के पति दीपक कुमार ने मेले का शुभारंभ किया। मेले में डेंटल सर्जन विकास त्यागी, टीबी के डॉ. कुलदीप सहरावत, होम्योपैथी के डॉ. विनय, मुनेश, अंकुज, वीएस मलिक ने लोगों का उपचार किया। आयुष विभाग ने दिव्यांग प्रमाणपत्र बांटे। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया। वहीं खाद्य विभाग की ओर से प्रजंन सिंह, नरेश कुमार ने भी लोगों को खान-पान के प्रति जागरूक किया।
मास्क का दिखा अभाव
कोरोना का खतरा बढ़ने पर प्रशासन की ओर से जिले में सार्वजनिक व भीड़ वाली जगहों पर मास्क अनिवार्य कर दिया है। मेले के लिए गाइड लाइन जारी की गई थी कि इसमें सहयोग देने वाले अधिकारियों के लिए मास्क लगाना अनिवार्य होगा, लेकिन प्रशासन के यह आदेश मेले में धता साबित हुए। अधिकांश अधिकारी बिना मास्क के ही मेले में शामिल हुए।
सर्वर ठप होने के कारण नहीं बने आयुष्मान कार्ड
मेले में जहां कई लोगों ने अपना उपचार कराया, वहीं कई लोग निराश वापस लौटे। क्षेत्र के महेंद्र कुमार, सचिन ने बताया कि वह आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए शिविर में आए थे, लेकिन सर्वर ठप होने के कारण उन्हें मायूस ही वापस लौटना पड़ रहा है।