संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में गर्मी बढ़ते ही कुत्ते और बंदर भी आक्रामक हो गए हैं। जिला अस्पताल व सभी सीएचसी पर रोजाना 250 से अधिक लोग कुत्ते व बंदर के हमले में घायल लोग एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं।
जिले में सड़कों व गलियों में आवारा कुत्ते झुंड में घूमते रहते हैं, जो आते-जाते लोगों, बच्चों और महिलाओं पर हमला कर घायल कर रहे हैं। सीएचसी शामली में ओपीडी में पहले एक दिन में करीब 40-50 मरीजों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं, लेकिन रोजाना 70 से ज्यादा लोगों को एंटी रेबीज लगाए जा रहे हैं। उधर, जिला अस्पताल में 40 से 45 मरीजों को एंटी रेबीज के इंजेक्शन लग रहे हैं। ऊन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात फार्मासिस्ट मनोज कुमार ने बताया कि एंटी रेबीज इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि रोजाना 20-25 लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाएं जा रहे हैं।
बाबरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्ट नितिन त्यागी ने बताया कि एंटी रेबीज का स्टॉक पूरी मात्रा में है।उनके यहां रोजाना एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। महीने में 10-12 लोगों को एंटी रेबीज लगवाने के लिए आते हैं।
थानाभवन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक डाॅ. सुशील कुमार ने बताया एंटी रेबीज के इंजेक्शन मंगलवार को लगाए जाते हैं। इमरजेंसी में मरीज को हर समय एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया जाता है। झिंझाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात फार्मासिस्ट देवेंद्र कुमार ने बताया कि सवा 11 बजे तक 12 मरीजों को एंटीरेबीज लगाया जा चुका है। एंटी रेबीज इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
सीरम की डोज लगाने की नहीं व्यवस्था
कुत्ते व बंदर यदि किसी मरीज को सिर, गर्दन या सीने पर काटकर गंभीर घायल कर देते हैं तो उन्हें सीरम इंजेक्शन की जरूरत होती है। जिला अस्पताल व सीएचसी में सीरम उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को हायर सेंटर मेरठ या दिल्ली रेफर किया जाता है।
नगर निकायों में कुत्तों को पकड़ने की व्यवस्था नहीं
नगरपालिका व नगर पंचायतों में आवारा कुत्तों को पकड़कर सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण आवारा कुत्तों के झुंड सड़कों से लेकर गलियों में घूमते रहते हैं और आते जाते लोगों पर हमला कर रहे हैं। पालिका में पालतू कुत्तों के पंजीकरण की भी व्यवस्था नहीं है।
कोट
जिला अस्पताल और जिले की सभी सीएचसी पर एंटी रेबीज के इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। अस्पतालों में ये इंजेक्शन निशुल्क लगाए जाते हैं। - डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ