दो साल बाद भी नहीं आई डीएनए रिपोर्ट
कैराना (शामली)। करीब दो साल पहले जगनपुर के जंगल में मिले दो युवतियों के शव के खून की जांच के लिए भेजे सैंपल की डीएनए रिपोर्ट दो साल बाद भी नहीं आई। यहां तक कि युवतियों की शनाख्त भी नहीं हो सकी। जबकि डीआईजी व फोरेंसिक टीम के साथ ही डॉग स्क्वायड ने घटना स्थल का निरीक्षण किया था।
20 मई 2020 की शाम जगनपुर के जंगल में दो युवतियों के खून से लथपथ शव मिले थे। दोनों के सिर पर धारदार हथियारों से वार किए गए थे और उनके हाथ पैर चादर से बांधे गए थे। दोनों की उम्र 20 से 25 साल के बीच थी। दोनों युवतियों के शवों की शनाख्त नहीं हो सकी थी। करीब छह दिन बाद मेरठ से पहुंची फोरेंसिक टीम ने एक मकान की तलाशी ली थी। टीम ने वहां से खून से सनी चादर, अन्य सामान और खून के धब्बे के सैंपल लेकर डीएनए टेस्ट के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजे थे। लेकिन दो साल में भी लखनऊ से डीएनए रिपोर्ट नहीं आ सकी।
शनाख्त न होने पर पुलिस ने दोनों का लावारिस मानते हुए अंतिम संस्कार कर दिया था। बाद में पुलिस ने मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। लेकिन पुलिस के उच्चाधिकारियों ने मुकदमे की विवेचना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक को सौंप दी। मामले में प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि उन्हें विवेचना मिली है। सभी तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है और युवतियों की पहचान करने का प्रयास भी किया जा रहा है।
युवतियों की शिनाख्त के लिए नेपाल बॉर्डर तक पहुंची थी पुलिस
युवतियों की शनाख्त नहीं होने के कारण पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी। जिस पर तत्कालीन एसआई सुशील कुमार ने नेपाल बॉर्डर के कई थाना क्षेत्रों में जाकर युवतियों के शवों के फोटो दीवारों पर चस्पा किए थे। साथ ही बॉर्डर के थानों से संपर्क करके पता लगाने का प्रयास किया था कि कहीं उनके क्षेत्र से युवतियों के लापता होने के मुकदमे तो दर्ज नहीं है। लेकिन कुछ पता नहीं चल सका।