शामली। जैन संत राजेंद्र मुनि महाराज ने दशलक्षण पर्व के तहत आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म के बारे में बताया। कहा कि त्याग एवं दान में बहुत बड़ा अंतर है। त्याग धर्म है, दान पुण्य है। दान-त्याग स्वयं की और परायी वस्तुओं पर किया जाता है।
मंगलवार को मिल रोड जैन स्थानक में जैन संत राजेंद्र मुनि महाराज ने कहा कि दान की गई वस्तुओं का दुरुपयोग हो रहा है। परम पिता परमेश्वर से हर जीव का संबंध बना रहना आवश्यक है। परमात्मा हर जीव में विराजमान है। दान कई प्रकार के है।
आहार भोजन दान, अभय दान, पानी व औषधि दान, विद्या दान आदि शामिल है। दान से त्याग महान है। गृहस्थ दान साधु करते हैं। बच्चों में संस्कार एवं त्याग की भावना होनी चाहिए। त्याग जीवन ही आत्मा को बचाता है। इस मौके पर अशोक जैन, विजय जैन, नानक चंद जैन, जेेके जैन, सतेंद्र, राजकुमार जैन, पीयूष, राजकुमार जैन, विपुल जैन आदि मौजूद रहे।