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दिव्यांगता को नहीं बनने दिया बाधा, लक्ष्य पर निशाना साधा

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शामली दिव्यांग पायल कश्यप - फोटो : SHAMLI
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शामली। दुनिया में सफलता के रास्ते में एक ही बाधा होती है, वह है नकारात्मक सोच। यदि सोच सकारात्मक हो और हौलसे बुलंद हो तो शारीरिक अक्षमता भी सफलता की सीढ़ी चढ़ने से नहीं रोक सकती। कुछ लोग इस बात को सच साबित कर न सिर्फ अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं। इन्होंने अपनी शारीरिक अक्षमता को कमजोरी नहीं बनने दिया। ऐसे ही चंद दिव्यांगों के संघर्ष की दास्तां से आपको रूबरू कराते हुए पेश है ये रिपोर्ट।
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गायक से म्यूजिक प्रोड्यूसर तक का सफर
शहर के दयानंद नगर निवासी पंकज जैन बचपन से ही पैरों से दिव्यांग हैं। इसकी वजह से बचपन में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। संगीत के शौक को उन्होंने अपनी जिंदगी का मकसद भी बना लिया। उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर जी टीवी, सहारा आदि चैनलों पर कई टीवी शो में शिरकत कर करते हुए गायकी के दम पर शोहरत हासिल की। मशहूर म्यूजिकल शो सारेगामापा से उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली। वर्तमान में वह म्यूजिक प्रोड्यूसर के रूप में स्थापित हो चुके हैं। फिलहाल पंजाब में गानों की शूटिंग में व्यस्त पंकज का कहना है कि यदि हौसला मजबूत हो तो इंसान की कामयाबी के बीच कोई शारीरिक अक्षमता आड़े नहीं आ सकती।
खेल क्षेत्र में अंकित ने बनाई पहचान
गांव काबड़ौत निवासी अंकित हाथ से दिव्यांग हैं। अंकित ने प्रदेश स्तरीय पैरा एथलेटिक्स में अपनी पहचान बनाई है। वह प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर प्रदेश का नाम रोशन कर चुके हैं। अब उनका लक्ष्य नेशनल प्रतियोगिता में पदक जीतने की है। जो फरवरी में है। इसके लिए वह जमकर तैयारी कर रहे हैं। अंकित का कहना है कि उन्होंने कभी अपनी शारीरिक अक्षमता को अपने लक्ष्य पर हावी नहीं होने दिया। उनका सपना पैरा ओलंपिक में खेलने का है।
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दूसरे दिव्यांगों का सहारा बन गई पायल
लतीफगढ़ गांव निवासी पायल कश्यप पैर से दिव्यांग हैं। इसके बाद भी वह दूसरे दिव्यांगों के लिए सहारा बन गई। समाजसेवा के क्षेत्र में आकर उन्होंने दिव्यांगों, महिलाओं की भलाई के लिए काफी कार्य किए। उन्हें पेंशन दिलाने और विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने में काफी अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा वह 37 गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रही हैं। पायल का कहना शारीरिक अक्षमता को कभी भी अपनी कमजोरी न समझें। अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें और दूसरों की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहें।
रजत ने क्रिकेट और संगीत के क्षेत्र में कमाया नाम
शहर की अटल विहार कॉलोनी निवासी रजत पांचाल पुत्री सतीश पांचाल बचपन से ही नेत्रहीन हैं। लेकिन बचपन से ही उन्हें क्रिकेट और संगीत का बेहद शौक रहा। उन्होंने भी अपनी शारीरिक अक्षमता के कारण हार नहीं मानी। वह दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहा है। अपनी मेहनत के बल पर उसने दिल्ली की ब्लाइंड क्रिकेट टीम में जगह बनाई और नेशनल स्तर की प्रतियोगिता में भाग लिया। इसके अलावा संगीत के क्षेत्र में भी अपनी गायकी से कई पुरस्कार जीते। रजत को गिटार बजाने का भी शौक है।

शामली क्षेत्र के गांव कबाडौत निवासी दिव्यांग अंकित- फोटो : SHAMLI

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