शामली। गोरखपुर की रामगढ़ ताल की तर्ज पर कैराना क्षेत्र की मामौर झील को विकसित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश शासन की ओर मामौर झील की चहारदीवारी के निर्माण के लिए ढाई करोड़ रुपये की धनराशि मंडल के पयर्टन विभाग को स्वीकृत की गई है।
कैराना क्षेत्र में मामौर झील में वर्तमान में कैराना के शहरी और ग्रामीण इलाकों से गंदा पानी भरा रहता है। गंदे पानी की समस्या को हल करने के लिए सरकार नमामि गंगे योजना के तहत एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण करा रही है, जिससे गंदे पानी को साफ करके यमुना में छोड़ने की कार्य योजना तैयार की गई। निर्मल हिंडन कार्यक्रम के तहत मामौर झील का प्रशासन द्वारा कायाकल्प करने का निर्णय लिया गया है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के समन्वयक व ग्रीन इंडियन कोर्पोरेशन के निदेशक उमर सैफ ने मामौर झील को स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त बनाने एक प्रोजेक्ट भी बनाया था। वर्ष 2017 में तत्कालीन डीएम इंद्र विक्रम सिंह के समक्ष इससे संबंधित प्रस्ताव रखा। इसके अंतर्गत झील पर एक वाटर प्लांट अथवा बायोडायवर्सिटी पार्क बटर फ्लाई पार्क के निर्माण की स्थापना के लिए पूर्व सांसद हुकुम सिंह ने इस मुद्दे को संसद में भी उठाया था। तत्कालीन डीएम ने 22 फरवरी 2018 को मामौर झील का निरीक्षण करके कायाकल्प के लिए वाटर प्लांट की स्थापना के निर्देश दिए थे। क्षेत्रीय पयर्टन विभाग सहारनपुर की ओर से मामौर झील के सुंदरीकरण के लिए 67 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया था। शासन से चाहरदीवारी निर्माण के लिए ढाई करोड़ रुपये अवमुक्त की गई है। धनराशि अवमुक्त होने का पत्र पर्यटन विभाग को प्राप्त हो गया है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविशंकर ने बताया कि मामौर झील को गोरखपुर की रामगढ़ ताल की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। पर्यटन विभाग की तरफ से नाव, होटल रेस्टोंरेट व खानपान आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। शासन को पर्यटन विभाग के माध्यम से 67 करोड़ रुपये का रिवाइज एस्टीमेट भेजा जाएगा।