शामली। किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने किसानों के साथ कलक्ट्रेट में पंचायत करके प्रदर्शन किया। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान शीघ्र दिलाने की मांग की गई, तो बिजली विभाग द्वारा किसानों का उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए रोष जताया गया।
मंगलवार को भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी देशपाल सिंह के नेतृत्व में किसान कलक्ट्रेट परिसर में पहुंचे। वहां पंचायत के दौरान भाकियू नेताओं ने कहा कि किसानों को समय पर गन्ना मूल्य भुगतान नहीं मिल रहा है। प्रदेश सरकार ने 14 दिन में भुगतान का आदेश दिया है, लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा और न ही किसानों को बकाया मूल्य पर 15 प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा है।
इस वजह से किसान परेशानियों से जूझ रहा है। वहीं, बकाया बिजली बिल जमा नहीं होने पर किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है, जब किसानों को उनका गन्ना मूल्य नहीं मिल रहा, तो किसान बिजली बिल कहां से जमा कराएं। इस दौरान भाकियू के प्रदेश सचिव विनोद निर्वाल, प्रदेश प्रवक्ता कुलदीप पंवार, अजयवीर त्यागी, युवा मंडल अध्यक्ष धीरज लाटियान, ईश्वर फौजी, अब्बास प्रधान, अरविंद खोड़समा, हाजी इरशाद, सरदार अजीत सिंह, समरपाल तोमर, ओमवीर पटवारी, नीटू, पुष्पेंद्र डायरेक्टर, मोमीन खान, ओमपाल प्रजापति, वासिफ खान, जाहिद हसन ने भी विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि बिजली विभाग द्वारा किसानों का उत्पीड़न बंद कराया जाए।
किसानों का काठा नदी पर बेमियादी धरना शुरू
झिंझाना। ऊन तहसील संघर्ष समिति की ओर से किसानों ने ऊन रोड स्थित काठा नाला पर बेमियादी धरना शुरू कर दिया है। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि जब तक काठा को नहर का दर्जा नहीं मिलेगा और पानी नहीं छोड़ा जाएगा, तब तक धरना जारी रहेगा। समिति के संयोजक तेजपाल गुर्जर हथछौया ने बताया कि क्षेत्र डार्क जोन घोषित होने के कारण किसानों को फसलों की सिंचाई करने के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
इसके अलावा विद्युत निगम कनेक्शन भी नहीं दे रहा है। गांव श्यामली श्यामला के पूर्व प्रधान उग्र सिंह चौहान ने बताया कि सपा सरकार में काठा नदी की साफ सफाई कराने के बाद नहर बनाकर पानी छोड़ने का प्रस्ताव भी भेजा गया था। लेकिन सरकार बदलने के साथ ही उक्त योजना भी बंद कर दी गई। किसानों ने कहा कि जब तक काठा नदी को नहर का दर्जा देकर उसमें पानी नहीं छोड़ा जाता तब तक धरना जारी रहेगा। इस दौरान कंवरपाल गागोर, महिपाल बझेड़ी, बाबूराम कोरी, राकेश लहरीपुर, किरणपाल वाल्मीकि, राजबीर सिंह, तेजपाल गुर्जर, रामकिशन बझेड़ी, उग्र सिंह चौहान, पप्पू नायक, सोमपाल, सहंसरपाल आदि किसान मौजूद रहे। ब्यूरो