झिंझाना। प्रसव के दौरान शिशु की मौत पर परिजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर काफी हंगामा किया। उन्होंने स्टाफ नर्स पर प्रसव के समय लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। बाद में एसडीएम ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
बृहस्पतिवार को ऊन निवासी कमल कुमार अपने परिजनों के साथ सीएचसी झिंझाना पहुंचा। कमल ने बताया कि गत 30 अगस्त को उसकी पत्नी शालू को प्रसव पीड़ा होने पर झिंझाना सीएचसी पर भर्ती कराया गया था। रात नौ बजे उसे स्टाफ नर्स विभा कहती रही नार्मल डिलीवरी होगी। आरोप है कि प्रसव के दौरान स्टाफ नर्स नेे लापरवाही बरती और प्रसूता को गलत तरीके से टांके लगाए। आरोप है कि शिशु की मौत के साथ ही प्रसूता को संक्रमण भी हो गया। उसे करनाल स्थित अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।
परिजनों के साथ स्वास्थ्य केंद्र पर हंगामा करने वालों ने कहा कि जब तक स्टाफ नर्स को निलंबित नहीं किया जाएगा, तब तक शांत नहीं होंगे। उधर, सीएचसी पर हंगामे की सूचना पर एसडीएम ऊन अवधेश सिंह, तहसीलदार मदनलाल राठौर सहित पुलिस भी मौके पर पहुंची। एसडीएम ने जांच के बाद नर्स के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन देने पर हंगामा शांत हुआ। हंगामा करने वालों में गौरव, अमित गोयल, कुलदीप, वरूण, सत्यम, बिटटू, प्रियंका, गुडिय़ा, सती, नूपुर सहित अन्य शामिल रहे।
ब्लड जांच रिपोर्ट नहीं देने पर भड़के
झिंझाना। इमराना, फातिमा निवासी गांव मंसूरा, मोमीन, गुल्सफा, मीना निवासी गांव बेदखेडी ने बताया कि सभी को वायरल बुखार आ रहा है। चिकित्सक तरूण चौधरी ने ब्लड जांच के लिये लिख दिया। आरोप है कि ब्लड सैंपल देने के बावजूद जांच रिपोर्ट एक सप्ताह बाद आने के लिये कहा। उसके बाद ही उपचार किया सकेगा। मरीजों को पैरासिटामोल जैसी गोलियां देकर टरकाया जा रहा है। उधर, डाक्टर तरुण चौधरी ने बताया कि ब्लड़ जांच करने वाले लैब असिस्टेंट पर झिंझाना, केरटू और ऊन पीएचसी का भी जिम्मा है। सप्ताह में दो दिन एक जगह पर बैठ रहा है। इसलिए जांच रिपोर्ट में देरी हो रही है।