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रोजगार की तलाश में 25 दिन पहले खींच लाई मौत

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कैराना पटाखा फैक्ट्री में धमाके से बचे श्रमिक मुनव्वर व गुडडू अपनी दास्तान बताते हुए - फोटो : SHAMLI
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कैराना (शामली)। ईंट भट्ठे पर काम करने वाले सात मजदूर भट्ठे बंद होने के बाद 25 दिन पहले बहराइच से पटाखा फैक्टरी में काम करने आए थे। इनको रोजगार की तलाश में मौत यहां खींच लाई। सात में से चार मजदूरों की धमाके में मौत हो गई। बाकी बचे मजदूरों ने अपनी और साथियों की दास्तान बयां की, तो पता चला कि परिवार की रोजी रोटी के लिए कैसे वह 800 किमी दूर से अवैध पटाखा फैक्टरी में काम करने को मजबूर हुए। यही नहीं जो फैक्टरी मालिक तमाम सब्जबाग दिखाकर उन्हें यहां लेकर आया था, वह धमाका होते ही मौके से भाग निकला।
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एक अक्तूबर को कैराना क्षेत्र के जगनपुर रोड पर अवैध पटाखा फैक्टरी में जोरदार धमाका हो गया था। धमाके के दौरान चार मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि चार घायल हो गए थे। हादसे में बहराइच निवासी श्रमिक मुनव्वर और गुड्डू बाल-बाल बच गए थे। मुनव्वर ने बताया कि उसके छोटी छोटी दो बेटियां हैं। गुड्डू के दो बेटे व एक बेटी हैं। वह बहराइच में ईंट भट्ठे पर मजदूरी का कार्य करते थे। पिछले दिनों उनके यहां ईंट भट्ठे बंद हो गए थे। उनके पड़ोसी गांव के कुछ श्रमिक पश्चिम यूपी के कई जनपदों में पटाखा फैक्टरी में काम करते हैं। उनके माध्यम से फैक्टरी संचालक राशिद ने उनसे संपर्क किया। नौ हजार प्रतिमाह वेतन पर बहराइच से सात श्रमिक करीब 25 दिन पहले कैराना पटाखा फैक्टरी में आए थे।
हादसे वाले दिन जुमा होने के कारण संचालक राशिद अपनी कार लेकर फैक्टरी पर आया। मुनव्वर, सलमान को सभी का खाना बनाने के लिए कहा। तभी राशिद अपनी गाड़ी में अन्य आठ श्रमिकों को कैराना कस्बे की एक मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़वाने के लिए लेकर गया। 2.15 बजे सभी फैक्टरी पर वापस आ गए। शाम करीब 4.30 बजे राशिद फैक्टरी के सामने पेड़ के नीचे खड़ा होकर किसी व्यक्ति से फोन पर बात करने लगा। वह दोनों फैक्टरी के बराबर में मौजूद ट्यूबवेल पर पीने का पानी लेने के लिए चले गए।
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इसी दौरान फैक्टरी में एक धमाका हुआ। वह दोनों फैक्टरी की ओर वापस मुड़े तो तभी एक और जोरदार धमाका हुआ। जिससे फैक्टरी मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। वह दोनों घबराकर जंगल की ओर भाग गए। फैक्टरी संचालक राशिद भी जंगल में सभी मजदूरों को छोड़कर भाग गया था। फैक्टरी के बाहर खड़ी राशिद की गाड़ी भी मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गई। उन्होंने बताया कि फैक्टरी संचालक ने उनको अभी तक सैलरी भी नहीं दी थी। जिस कारण उनके पास पैसे भी नहीं हैं। दोनों मजदूर बहराइच से आने वाले मृतक व घायल मजदूरों के परिजनों के आने की आस में कोतवाली में बैठे हुए हैं।
अवैध पटाखा फैक्टरी में मानकों की की गई थी अनदेखी
फैक्टरी में पटाखे बनाने के लिए कई सावधानी बरतनी पड़ती हैं। सुरक्षा के लिए मानक भी बनाए गए हैं, लेकिन धरातल पर सुरक्षा के मानक कुछ भी नजर नहीं आते। विस्फोट के बाद धराशायी हो चुकी फैक्टरी में न तो आग बुझाने के लिए पानी की कोई व्यवस्था की गई थी और ना ही अग्निशमन यंत्र थे। मात्र मामूली वेतन पर श्रमिकों को फैक्टरी संचालक राशिद ने मौत के मुंह में काम करने के लिए छोड़ दिया।
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