शामली। राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में ‘घरौंदों से आसमान तक की उड़ान’ विषय पर वर्चुअल कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जनपद के डिग्री कालेजों की छात्राओं ने सहभागिता की।
सोमवार को आयोजित कार्यशाला में समाजसेविका एवं स्मार्ट गर्ल प्रशिक्षिका डॉ. रितु जैन ने बालिकाओं को बताया कि देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी की स्मृति में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 24 जनवरी 2009 को राष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में 24 जनवरी का दिन घोषित किया। महिला सशक्तिकरण का वह एक सुदृढ़ उदाहरण है कि भारत की सभी बेटियां अपनी क्षमताओं को समझें और सक्षम बनकर सशक्त भारत के निर्माण में अपनी सराहनीय भूमिका अदा करें। बेटी है जीवन का आधार ना समझो कोई इसको भार, बेटियों ने भी खुलकर कार्यशाला में अपने विचारों को रखा। कार्यशाला में सहभागिता कर रही हिमानी निर्वाल और सिया ने बताया कि आज भी कई परिवार ऐसी सोच के हैं जिसमें बेटियों को उच्च शिक्षा से रोक दिया जाता है। बेटियां आज भी उच्च शिक्षा से कई कारणों से वंचित है। जरूरत है ऐसी बेटियों का पता लगाकर उन्हें उनकी उच्च शिक्षा के लिए और उनके भविष्य के निर्माण के लिए प्रशासन और एनजीओ को साथ मिलकर कार्य करने की।
नीतू कोरी ने बताया कि कई और समस्याएं भी हैं, जिनका आज बेटियां सामना कर रही हैं। भारत जरूर प्रगति के पथ पर है महिलाओं की स्थिति में सुधार भी है लेकिन कहीं ना कहीं अभी भी आवश्यकता है और अधिक सुधार की ताकि भारत की हर एक बेटी एक सशक्त महिला के रूप में अपनी पहचान बना सके। रिया संगल ने बेटी शीर्षक से कविता पाठ किया। अंशु ने कहा कि बहुत सी लड़कियां एनडीए और आर्मी में जाना चाहती हैं, लेकिन कई बार उन्हें वह सभी जानकारियां प्राप्त नहीं हो पाती हैं जिससे वे उस पद को सुशोभित कर सके।
नाजरीन ने बताया कि वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती है और डीएम जसजीत कौर को अपना आदर्श बताया। कार्यक्रम का संचालन और संयोजन डॉ. रितु जैन ने किया। कार्यशाला में पूजा ठाकुर, रश्मि, फरीन, मुसबीरा अहमद, रेणु, वैष्णवी, शालू, रेशु आदि ने सहभागिता की। इस दौरान उप्र स्थापना दिवस के बारे में जानकारी दी गई।