शामली। बिजनौर में छेड़छाड़ को लेकर हुई फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई। शामली जिले में भी छेड़छाड़ को लेकर पूर्व में कई बार बवाल हो चुके हैं। यदि छेड़छाड़ के मामलों पर पुलिस गंभीरता नहीं बरतती है, तो परिणाम घातक हो सकते हैं।
गौरतलब है कि 2013 में आजाद चौक के पास एक युवती से गैंगरेप के बाद शामली में जमकर बवाल हुआ था, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया था। भाजपा और हिंदू संगठनों ने इसको लेकर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज भी कर दिया था। वहीं, 2013 में ही लिसाढ़ गांव में एक युवती को दूसरे समुदाय का युवक बहला फुसलाकर ले गया था, जिसके बाद तोड़फोड़ और जमकर हंगामा हुआ था।
वहीं, 2014 में मिल रोड पर छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में आरोपी युवक को पीट पीटकर मार दिया गया था। बीते माह नौ अगस्त को बुढ़ाना रोड पर एक स्कूल की छात्रा को दूसरे समुदाय के युवक ने छेड़छाड़ कर दी थी, जिसके बाद काफी हंगामा हुआ था। उधर, गांव खेड़ीकरमू में एक साल पूर्व युवती से छेड़छाड़ को लेकर दो पक्षों में जमकर संघर्ष हुआ था। यह कुछ घटनाएं हैं, जो छेड़छाड़ के कारण बवाल कराती रहीं।
सीओ सिटी ने किया पैदल मार्च
बिजनौर की घटना के बाद पूरे जोन में अलर्ट जारी कर दिया गया। इसी के चलते बृहस्पतिवार शाम सीओ सिटी निशांक शर्मा ने शामली कोतवाली पुलिस को साथ लेकर शहर में पैदल मार्च निकाला। शहर के प्रमुख मार्गों पर घूमते हुए सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। कई स्थान पर युवकों को बेवजह घूमते मिलने पर हड़काया गया।
वेस्ट यूपी में बवाल का कारण बनती छेड़छाड़
शामली। छेड़छाड़ के मामलों को लेकर वेस्ट यूपी लगातार सुलग रही है। बिजनौर में तीन लोगों की हत्या इसका ताजा उदाहरण है। कोई जिला अछूता नहीं है, जहां छेड़छाड़ की वजह से सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा ना हुई हो। ऐसे में जरूरत है कि पुलिस प्रशासन गंभीरता से कार्रवाई करे, ताकि छेड़छाड़ के कारण वेस्ट यूपी के लोग सांप्रदायिकता की आग में ना झुलस सकें।
2013 में मुजफ्फरनगर का सांप्रदायिक दंगा भी छेड़छाड़ को लेकर ही शुरू हुआ था। अगस्त 2013 में जानसठ क्षेत्र के गांव कवाल निवासी सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद पंचायतों का दौर चला और फिर सात सितंबर को मुजफ्फरनगर तथा शामली जिले में सांप्रदायिकता की आग भड़क गई थी।
उससे पूर्व जुलाई 2013 में ही शामली में आजाद चौक पर एक युवती से गैंगरेप के मामले को लेकर बवाल हुआ था। शिवचौक पर प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायकों पर पुलिस ने लाठीचार्ज भी कर दिया था। उधर, 26 जून 2015 को सहारनपुर के रामपुर मनिहारन में छेड़छाड़ को लेकर हुई फायरिंग में गोली लगने से वसीम नामक युवक की मौत हो गई थी। जिसके बाद बवाल हुआ और रामपुर मनिहारान के थानाध्यक्ष भी घायल हो गए थे।
2015 में ही गाजियाबाद के फरीदनगर में छेड़छाड़ को लेकर दो समुदायों में टकराव हुआ था, जिसमें पुलिस के वाहनों में भी तोड़फोड़ कर दी गई थी। वहीं, मेरठ के मोहल्ला लालकुर्ती और नौचंदी थाना क्षेत्र में छेड़छाड़ को लेकर कई बार बवाल हो चुके हैं। इन सब में पुलिस की लापरवाही बड़ी जिम्मेदार रही। क्योंकि छेड़छाड़ की घटना होने पर सूचना मिलने के बावजूद पुलिस मौके पर नहीं पहुंच पाती, जिस कारण माहौल बिगड़ जाता है।
चुनावी सीजन बड़ी चुनौती
यूपी के विधानसभा चुनाव भी नजदीक आ रहे हैं। वेस्ट यूपी में छेड़छाड़ की घटनाओं को लेकर बवाल होने से राजनीतिक लोग भी सक्रिय हो जाते हैं। कोई माहौल शांत करने में सहयोगी बनता है, तो कोई माहौल को गरमाने की साजिश रचता है। ऐसे में पुलिस प्रशासन की चुनौती और बढ़ जाती है कि माहौल को किस तरह ठीक रखा जाए।