शामली। मुकीम काला गिरोह के सक्रिय सदस्य और 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश महताब के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद हथियार तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि वेस्ट यूपी, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड के अपराधी अब स्थानीय स्तर या दिल्ली से हथियार खरीदने के बजाय नेपाल, महाराष्ट्र और बंगलूरू के जरिए कार्बाइन व 9 एमएम पिस्टल समेत आधुनिक हथियार मंगा रहे हैं।
पुलिस को महताब के साथी पानीपत के शाहरुख के व्हाट्सएप ग्रुप की भी जानकारी मिली है, जिसमें हथियारों की खरीद-फरोख्त और सप्लाई की डील होती थी। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि 50 हजार से एक लाख रुपये तक में अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराए जा रहे थे।
एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। बदमाश लूट, डकैती और बड़ी वारदातों को अंजाम देने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से हथियारों की मांग करते थे। ऑर्डर मिलने के बाद महाराष्ट्र के बुरहानपुर, बंगलौर और नेपाल से जुड़े नेटवर्क के जरिए हथियारों की सप्लाई की जाती थी। यह नेटवर्क शामली, बागपत, सहारनपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, दिल्ली और हरियाणा के रोहतक, करनाल, हिसार, सोनीपत, पानीपत और गुरुग्राम तक सक्रिय बताया जा रहा है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि हथियारों की खरीद-फरोख्त के लिए गिरोह ने विशेष कोड वर्ड तय कर रखे थे। कार्बाइन के लिए ''मोटा माल'', पिस्टल के लिए ''जेब खाली'' और तमंचे के लिए ''खुद की सुरक्षा'' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था ताकि बातचीत संदिग्ध न लगे। हथियारों की सप्लाई कराने वाले दलाल प्रत्येक सौदे पर 20 हजार रुपये तक अतिरिक्त वसूलते थे।
वारदात के बाद महाराष्ट्र और बंगलौर में लेते थे शरण
एसपी के अनुसार, जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह के सदस्य लूट और अन्य संगीन वारदातों को अंजाम देने के बाद पहले की तरह हरियाणा या वेस्ट यूपी में नहीं रुकते थे। पुलिस से बचने के लिए अब वे महाराष्ट्र और बंगलौर में मौजूद अपने साथियों के पास चले जाते थे। वहां रहकर वे स्थानीय स्तर पर भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहते थे। गिरोह को लगता था कि दूसरे राज्यों में रहने से पुलिस की पकड़ से आसानी से बचा जा सकता है।
व्हाट्सएप ग्रुप से खुलेंगे कई बड़े राज
पुलिस को मिले व्हाट्सएप ग्रुप को जांच का अहम आधार माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ग्रुप में मौजूद चैट, नंबर और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के जरिए हथियार सप्लायरों, खरीदारों और गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सकेगा। पुलिस साइबर विशेषज्ञों की मदद से पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पत्नी के सोशल मीडिया अकाउंट का करता था इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार महताब मोबाइल फोन का उपयोग बेहद कम करता था। वह अपनी पत्नी के मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए गिरोह के सदस्यों से संपर्क बनाए रखता था। कई बार उसने इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी अपने साथियों से बातचीत की। पुलिस का मानना है कि इसी डिजिटल ट्रेल ने आरोपी तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हर राज्य में बदल लेता था पहचान
महताब पुलिस से बचने के लिए अलग-अलग राज्यों और शहरों में अलग-अलग नामों से रह रहा था। शामली में वह ''बेचैन'', पानीपत में ''पहलवान'' और सहारनपुर में ''मोनू'' के नाम से जाना जाता था। बार-बार पहचान बदलने की वजह से पुलिस को उसकी गतिविधियों का पता लगाने में काफी मुश्किलें आती थीं।
मेड इन इटली निकली 9 एमएम पिस्टल
मुठभेड़ के दौरान महताब के कब्जे से बरामद 9 एमएम पिस्टल मेड इन इटली पाई गई है। वहीं उसके पास से मिली कार्बाइन और अन्य हथियारों की फोरेंसिक व तकनीकी जांच कराई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ये हथियार किन रास्तों और किन तस्करों के माध्यम से उत्तर भारत तक पहुंचे।
एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि महताब की मौत के बाद मिले सुरागों से हथियार तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना है। पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगी हैं और जल्द ही गिरोह से जुड़े अन्य बदमाशों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।