पश्चिमी यूपी में लोकसभा चुनाव के लिए इंडिया गठबंधन के लिए पहले जो तस्वीर थी, उसमें रालोद, कांग्रेस, सपा को एक साथ रहना था, लेकिन रालोद एनडीए के साथ जा रहा है। ऐसे में सपा और कांग्रेस ने पश्चिमी यूपी में मुस्लिम से लेकर जाट, हिंदू गुर्जर, सैनी, कश्यप, ठाकुर और अन्य वोटरों को साधने के लिए चुनावी राह पर एक साथ होने का निर्णय लिया है।
सपा और कांग्रेस को इस गठबंधन से उम्मीद है कि मुस्लिमों के साथ-साथ सभी वर्गों के वोट उन्हें मिलेंगे, जिसके जरिए इस पर भाजपा को हराकर जीत दर्ज की जा सकेगी। हालांकि, जीत का सेहरा किसके सिर पर बंधेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
कई की उम्मीदों पर फिर गया पानी
कैराना लोकसभा सीट पर सपा और कांग्रेस से कई दावेदार संभावित प्रत्याशी थे, जो पिछले काफी समय से चुनाव की तैयारी में लगे हुए थे। लगातार लोगों के बीच जाकर चुनावी पिच तैयार कर रहे थे, मगर सपा से इकरा हसन के प्रत्याशी घोषित होने के बाद संभावित प्रत्याशियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। माना जा रहा है कि प्रत्याशी बसपा और अन्य दलों में जाने के लिए प्रयासरत हैं।
कांग्रेस-सपा के गठबंधन के बाद कैराना लोकसभा सीट पर पार्टी और भी अधिक मजबूत हुई है। मुस्लिमों के साथ-साथ प्रत्याशी को सभी वर्गों का मत मिलेगा। कांग्रेस सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है, जिसके कारण सभी वर्ग के लोग मत देंगे। घोषित प्रत्याशी को मजबूती के साथ चुनाव लड़ाया जाएगा। - दीपक सैनी, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
सपा के कार्यों से पहले ही लोग प्रभावित हैं। सपा के साथ हर वर्ग का वोट है। सपा सभी को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है। रालोद-भाजपा गठबंधन के बाद जिले में सपा और भी अधिक मजबूत हुई है। प्रत्याशी को मजबूती के साथ चुनाव लड़ाया जाएगा। सभी वर्गों की वोट ही पार्टी की जीत का आधार हैं। - अशोक चौधरी, सपा जिलाध्यक्ष