शामली। शीतलहर के चलते जिले में अस्थमा, निमोनिया, सर्दी, खांसी, जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल, सीएचसी में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीजों की भरमार है। चिकित्सकों का कहना है कि जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। चिकित्सक बच्चों, बड़ों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज गर्ग का कहना है कि इन दिनों अस्थमा, निमोनिया, सर्दी, खांसी, जुकाम के मरीज बच्चों की संख्या बढ़ गई है। इस वक्त बच्चों को ठंड से बचाकर रखना बहुत जरूरी है। इसके साथ पर्सनल हाइजीन यानी साफ सफाई का ध्यान रखें। बच्चों के सिर, पैर आदि अच्छी तरह ढककर रखें। बच्चों को स्वास्थ्यवर्धक और पर्याप्त भोजन कराएं और उन्हें ठंड से बचाकर रखें। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक ने बताया की बच्चों को च्यवनप्राश और हल्दी वाला दूध जरूर दें। दूध में एक से लेकर चार खजूर उबालकर उस दूध को बच्चों को पिलाएं। बच्चों के लिए एक खजूर और बड़ों के लिए चार से पांच खजूर का प्रयोग कर सकते हैं। तिल और गुड़ वाले लड्डू, मूंगफली भी ठंड का असर कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बेहतर उपाय है। कच्चे आंवले का प्रयोग किसी न किसी रूप में किया जाए।
अपनी दवाएं बंद न करें अस्थमा के मरीज
डॉ. पंकज गर्ग के अनुसार सर्दी से बचने को पूरे उपाय रखें। अस्थमा के मरीज अपनी दवाएं बंद नहीं करें। इनहेलर अपने पास रखें। कमरे में हीटर चला रहे हों तो ऑयल हीटर का प्रयोग करें ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके। अस्पताल की ओपीडी में भी अस्थमा और श्वास और फेफड़े संबंधित रोग के मरीज आ रहे हैं।
बचाव को यह करें
: खुद को ठंड से बचाएं
: गुनगुना पानी पीएं।
: गर्म पानी की बोतल से मरीज सिकाई करें।
: हल्का खाना लें, योग करते रहें
जरा सी तकलीफ होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।