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अव्यवस्थाएं मिलीं अपार, सुधार की अभी दरकार

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शामली क्षेत्र के गांव करमू खेडी से ई रिक्शा में स्कूलो में बटने के लिये जाता मिड डे मील का खाना - फोटो : SHAMLI
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शामली/थानाभवन/कैराना। जनपद में मिड-डे मील को लेकर कई विद्यालयों में अव्यवस्थाएं मिलीं। कहीं पर साफ-सफाई अच्छी नहीं मिली तो कहीं पर भोजन माता गायब मिली। कहीं पर बच्चे जमीन पर बैठकर दूध पीते हुए मिले। कहीं पर बच्चे थाली साफ करते हुए मिले। नगर क्षेत्र में अधिकतर विद्यालयों में एनजीओ द्वारा मिड-डे मील का वितरण किया जाता है, जबकि गांव देहात में विद्यालय में ही मिड-डे मील बनाया जाता है।
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प्राथमिक विद्यालय नंबर दो बलवा
दोपहर में साढ़े 12 बजे बच्चे लाइन में खड़े होकर मिड-डे मील ले रहे थे। भोजन माता उन्हें ताहरी का वितरण कर रही थी। इसके बाद बच्चे टाट पट्टी पर बैठकर मिड-डे मील खा रहे थे। इसके बाद बच्चे अपनी थाली को नल पर ले जाकर साफ करने लगे। हालांकि भोजन माता भी थाली साफ कर रही थी। कैमरा देखते ही प्रधानाध्यापक ने बच्चों को थाली साफ करने से मना कर दिया। प्रधानाध्यापक बिजेंद्र सिंह ने बताया कि बच्चों से कोई बर्तन साफ नहीं कराया जाता।
प्राथमिक विद्यालय नंबर एक सिंभालका
प्राथमिक विद्यालय में दोपहर को बच्चे मिड-डे मील में ताहरी खा रहे थे। बरामदे में अधिकतर बच्चे टाट पट्टी पर बैठे थे तो कुछ बच्चे बरामदे के किनारे बेतरतीब तरीके से बैठकर खा रहे थे। कुछ बच्चे जमीन पर बैठकर खा रहे थे। अध्यापिका ने बताया कि बच्चों को टाट पट्टी पर बैठाकर मिड-डे मील दिया जाता है। यहां पर भोजन माता गेेहूं को साफ कर रही थी। उसने बताया कि गेहूं में कूड़ा, मिट्टी निकल रही है। गेहूं और चावल राशन की दुकान से आता है।
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प्राथमिक विद्यालय कुतुबगढ़ नंबर दो नियमानुसार तो प्राथमिक विद्यालयों में मिड-डे मिल का समय दोपहर 12 से एक बजे का है, लेकिन यहां हालत ये थे कि दोपहर के साढ़े 11 बजे तक भोजन माताएं स्कूल में नहीं पहुंची थीं। राशन भी बोरे में जमीन पर ही रखा था। प्रधानाध्यापक राकेश कुमार ने बताया कि भोजनमाता को दो बार फोन किया गया है। जवाब मिला कि उसे बुखार है। वे किसी अन्य माध्यम से खाने की व्यवस्था करा रहे हैं।
प्राथमिक विद्यालय कुतुबगढ़ नंबर एक
विद्यालय में हालांकि, सुबह के समय झाडू़ लगाई गई थी, लेकिन फिर भी स्कूल के परिसर में कई जगह छोटे-छोटे कूड़े के ढेर लगे थे। इतना ही नहीं, बुधवार को बच्चों को मिड-डे मिल में ताहरी व दूध दिया जाता है, लेकिन, बच्चों के लिए खाना खाने के लिए नीचे टाट भी नहीं डाले गए, जिस कारण सर्दी के मौसम में भी बच्चे जमीन पर ही बैठकर दूध पी रहे थे, जिससे ठंड लगने से उनके स्वास्थ्य के खराब होने खतरा हो सकता है। प्रधानाध्यापक राजीव ने बताया कि बच्चों के लिए पूरी व्यवस्था है। कुछ बच्चे जानबूझकर ही नीचे बैठ गए थे।
प्राथमिक विद्यालय मरगूबगढ़
इस विद्यालय के परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था ठीक थी और मिड-डे मील का भोजन भी समय से बनाया जा रहा था, लेकिन मिड-डे मिल बनाने की रसोई में साफ सफाई नहीं थी। रसोई में जगह-जगह मसाले व गंदगी थी। मिड-डे मिल खाने के बाद बच्चों को बर्तन भी खुद साफ करनेे पड़े। प्रधानाध्यापक की अनुपस्थिति मेें स्टॉफ ने बताया कि नियमित साफ-सफाई की जाती है।
प्राथमिक विद्यालय मलकपुर
कैराना ब्लाक के विद्यालय में रसोई के अंदर गैस चूल्हे पर तहारी बनाई जा रही थी। विद्यालय के प्रधानाध्यापक वासिल अली ने बताया कि उनके स्कूल में नईमा, मीना, शकुंतला रसोईमाता 180 बच्चों का खाना बनाती है। आज तहारी व दूध दिया जा रहा है।
प्राथमिक विद्यालय खेड़ा मजरा नगलाराई
कुल 42 बच्चों के लिए दो रसोईमाता रसोई के अंदर ही गैस चूल्हे पर तहारी बनाती मिली। प्राथमिक विद्यालय रामड़ा की प्रधानाध्यापिका अंजली तोमर ने बताया कि स्कूल में कुल 150 बच्चों में से आज 95 बच्चे आए हैं, जिनके लिए स्कूल की रसोई में मेन्यू के हिसाब से तहारी और दूध तैयार किया जा रहा है। यहां भी मिड-डे मील रसोई के अंदर बनाया जा रहा था।
जनपद में मिड-डे मील की स्थिति
विद्यालयों की संख्या : 800
प्राथमिक विद्यालय : 538
उच्च प्राथमिक : 262
आठवीं तक के छात्रों की संख्या : कुल 87,297
जनपद में काम करने वाले एनजीओ : 4
किस ब्लॉक में किसे जिम्मेदारी
शामली ब्लाक में उज्जवला सवेरा समिति - प्रा. 15, उ. प्रा. तीन, मा. 9, छात्र 4200
ऊन ब्लाक में सघन क्षेत्र विकास समिति - माध्यमिक विद्यालय आठ, छात्र 2190
थानाभवन ब्लाक में मानव सेवा समिति - माध्यमिक विद्यालय आठ, छात्र 2360
कैराना, कांधला ब्लाक में जन कल्याण सेवा समिति : कांधला, कैराना नगर के प्राथमिक विद्यालय 38, क्षेत्र के सभी माध्यमिक विद्यालय, छात्र 7353
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मिड-डे मील का मेन्यू का साप्ताहिक कलेंडर
सोमवार फल, सब्जी रोटी
मंगलवार दाल-चावल
बुधवार दूध, ताहरी
बृहस्पतिवार दाल-रोटी
शुक्रवार ताहरी
शनिवार सब्जी चावल
कोट
मेरा दौराला में प्लांट है। वहां से मेरठ में भी सप्लाई होती है। शामली में पहले बच्चों की संख्या कम थी तो शामली में ही संस्था की रसोई में महिलाओं से तवे पर रोटी बनवा ली जाती थी। अब महिलाएं ना मिलने की वजह से रोटी बनाने में परेशानी हो रही है। इसी वजह से दौराला से रोटियों की व्यवस्था की गई। सुबह ही ताजी रोटी बनाकर वहां से 45 मिनट में आ जाती हैं। - रविंद्र पाल, सचिव उज्जवला सवेरा समिति

शामली प्राथमिक स्कूल न013 में मिड डे मील का खाना खाते बच्चे- फोटो : SHAMLI

शामली क्षेत्र के गांव बलवा प्राथमिक स्कूल में मिड डे मील का खाना बच्चो को बाटती भोजन माता- फोटो : SHAMLI

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