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खुद के बुने जाल में फंसे चेयरमैन संगल

Sat, 30 Apr 2016 12:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शामली
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शामली। एससीएसटी एक्ट के मामले में फंसे नगरपालिका शामली के चेयरमैन अरविंद संगल को अपने बचाव में चला पैंतरा उलटा पड़ गया। एक साल पूर्व अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण के खिलाफ जो प्रस्ताव पारित किए गए थे, उन्हें वापस लेने को आपातकालीन बोर्ड बैठक बुला ली। बोर्ड बैठक में कोरम भी पूरा नहीं किया गया, जिस पर सभासदों ने विरोध कर दिया और बोर्ड बैठक को औचित्यहीन तथा चेयरमैन की मनमानी करार दिया है। 
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  दरअसल, पूर्व अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण ने अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में चेयरमैन अरविंद संगल के खिलाफ एससीएसटी एक्ट, छेड़छाड़ और सरकारी कार्य में बाधा डालने की रिपोर्ट शामली कोतवाली में दर्ज कराई थी। 
उस मामले में चेयरमैन अरविंद संगल को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली। वहीं, एक साल पूर्व नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में अमिता वरुण के खिलाफ तीन प्रस्ताव पास किए गए थे। चेयरमैन अरविंद संगल ने एससीएसटी एक्ट के मामले में  खुद को बचाने के लिए शुक्रवार दोपहर बाद पालिका सभासदों की आपातकालीन बैठक बुलाई। उसका एजेंडा अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण का निंदा प्रस्ताव वापस लेने, फाइलों संबंधी जांच और शामली नगरपालिका में ही स्थानांतरण कराने का प्रस्ताव  पारित किया। 
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  सभासद सेठपाल और विनोद पांचाल ने बताया कि बोर्ड बैठक में ही इसका विरोध जताया गया। क्योंकि बैठक में सिर्फ 14 सभासद मौजूद थे, बाकी सभासदों के पति मौजूद थे। बोर्ड में कुल  25 सभासद हैं, जिसमें से कोरम के लिहाज से कम से कम 17 सभासद बोर्ड बैठक में मौजूद  होने चाहिए। 
  इस लिहाज से बोर्ड बैठक का कोरम भी पूरा नहीं किया गया। सेठपाल और विनोद पांचाल का कहना है कि चेरयमैन अरविंद संगल ने अपने हित में  आपातकाल बोर्ड बैठक बुलाकर मनमाने ढंग से नियम विरुद्ध प्रस्ताव कर लिए हैं, जिसका       वह पुरजोर विरोध करते हैं। 
बैठक के बाद चेयरमैन अरविंद संगल ने मीडिया से दूरी बना ली और न तो कोई कॉल रिसीव  िकया और न ही किसी मैसेज का       जवाब दिया।
  164 के बयान होंगे महत्वपूर्ण 
चेयरमैन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद पूर्व अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण ने पुलिस को धारा 161 के तहत बयान दर्ज करा दिया  है। साथ ही नगरपालिका में पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण भी करा चुकी हैं। मामले की विवेचना सीओ सिटी निशांक शर्मा कर रहे हैं। सीओ सिटी का कहना है कि मामले में पीड़िता का मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया बयान महत्वपूर्ण माना जाएगा। केस में समझौते को बनाई रणनीति 
सूत्रों की मानें, तो चेयरमैन अरविंद संगल ने पूर्व अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण से एससीएसटी एक्ट के मामले में समझौते को लेकर ही यह रणनीति बनाई। उसके मुताबिक बोर्ड बैठक में अमिता वरुण पर पूर्व की बैठक में लगाए आरोप वापस लेने थे, ताकि अमिता वरुण को केस में समझौते के लिए राजी कर लिया जाए। चर्चा है कि अमिता के केस में गवाह बने सभासदों को भी अपने पक्ष में करने के लिए डोरे डाल दिए हैं। 
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