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Shamli News: गूगल के फेर में फंसकर पशुओं का बांझपन बढ़ा रहे पशुपालक

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शामली। अप्रशिक्षित पशु चिकित्सक और गूगल के फेर में फंसकर जिले के कुछ पशुपालक बांझपन से शिकार पशुओं की जान जोखिम में डाल रहे हैं। पशुपालन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में इस साल 14 हजार 400 पशु बांझपन के शिकार मिले, जिनमें से 1200 गंभीरावस्था वाले पशु ठीक नहीं हो सके। पशुपालन विभाग ने अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी है। विभागीय अधिकारी पशुपालकों से पशुओं का सरकारी या फिर योग्य चिकित्सक से ही उपचार कराने की सलाह दे रहे हैं। शामली में 27 पशु अस्पतालों और 27 पशु सेवा केंद्रों में हर माह 26 हजार से अधिक पशुओं को पशुपालक उपचार कराने के लिए लाया जाता है। पशुपालन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में विभिन्न स्थानों से 1200 बांझपन से ग्रस्त गाय, भैंस को सरकारी पशु अस्पतालों में उपचार के लिए लाया गया इनमें 1100 को उपचार देकर चिकित्सकों ने ठीक कर दिया जबकि 100 गंभीर हालत के कारण ठीक नहीं हो सके। रिपोर्ट के अनुसार साल में 14 हजार 400 लोग बांझापन से पीड़ित पशु अस्पतालों में लाए जाते हैं।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी चंद्रभानू कश्यप ने बताया कि जांच में सामने आया है कि कैराना, शामली, ऊन, जलालाबाद में कुछ पशुपालक सरकारी के बजाए गांव-गली में बैठे अप्रशिक्षित के पास पशु को लेकर जाते हैं, जिन्हें उपचार का ज्ञान नहीं होता और बांझपन की समस्या बढ़ जाती है, जिसे ठीक करना बाद में संभव नहीं हो पाता। इसके अलावा 30 प्रतिशत मामले ऐसे भी सामने आ रहे हैं, जिनमें पशुपालक गूगल की मदद से उपचार खुद ही करने लगते हैं। बाद में हालत ज्यादा खराब होने पर सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचते हैं। 30 प्रतिशत से अधिक मामलों में अधिक पौष्ठिक आहार नियमित रुप से नहीं खिलाने के कारण भी बांझपन बढ़ने के मामले सामने आए हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल करके पशुपालकों के पशुओं को घर पर ही उपचार मिल सकेगा। कॉल करने के 15 मिनट से लेकर आधा घंंटे के अंदर एंबुलेंस को मौके पर पहुंचना होता है। जिले में चार एंबुलेंस सेवा है। सेवा का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। टोल फ्री नंबर पर कॉल पूरी तरह से निशुल्क होती है। संवाद
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