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सड़क पर बसों का कब्जा, राहगीर बेहाल

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शामली रोडवेज बस अड्डे के सामने सड़क पर खड़ी बसें। - फोटो : SHAMLI
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- बस स्टैंड के बाहर बसें खड़ी कर बैठाई जाती हैं सवारियां
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- दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर बने रहते हैं जाम के हालात
फोटो...
अमर उजाला ब्यूरो
शामली। दिल्ली-यमुनोत्री और मेरठ-करनाल हाईवे के चौराहे पर स्थित रोडवेज बस स्टैंड शहर के लिए मुसीबत बन गया है। चालक स्टैंड के बाहर दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर बसें खड़ी करके सवारियां बैठाते हैं। उनके साथ ही निजी बसें भी यहीं खड़ी कर दी जाती हैं। इसके अलावा ठेले-रेहड़ी वालों का अतिक्रमण पूरी सड़क को जाम कर देता है। दिन भर रोडवेज बस स्टैंड की ओर से गुजरना चुनौती भरा रहता है। दुपहिया वाहनों तक के निकलने के लिए जगह नहीं बचती।
रोडवेज बस स्टैंड का एक गेट मेरठ-करनाल हाईवे पर है जबकि दूसरा दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे की ओर है। मेरठ-करनाल हाईवे पर वाहनों की आवाजाही के चलते हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर रोडवेज और प्राइवेट बसों के चालक अपनी बसें खड़ी कर देते हैं। इससे दिन भर सड़क लगभग बंद रहती है। दोपहर बाद तो हालात बेहद खराब हो जाते हैं। दुपहिया वाहन चालकों को भी रास्ता बदलकर जाना पड़ता है।
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धूल और जाम से दुकानदार परेशान
रोडवेज बस स्टैंड के आसपास के दुकानदार धूल और जाम के कारण बेहद परेशान रहते हैं। ढाबा संचालक राजेश कुमार बताते हैं कि जाम के कारण ग्राहक इस ओर नहीं आते। ढाबे के बाहर बाइक खड़ी करने की भी जगह नहीं बचती है। चाय विक्रेता प्रवीण जैन का कहना है कि पूरे दिन सड़क पर जाम लगा रहता है। चालक मनमाने तरीके से बसें सड़क पर खड़ी करके सवारियां बैठाते हैं। फल विक्रेता सचिन का कहना है कि बस स्टैंड के बाहर बसें खड़ी करने पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए। मोनू और तिलकराज कहते हैं कि बसों को बाहर खड़ी कर सवारियां बैठाने से पूरी सड़क बंद हो जाती है। चालक अन्य वाहनों के लिए जगह नहीं छोड़ते। स्त्रत्त् ----------
50 साल से चल रहा बस स्टैंड
शहर में रोडवेज बस स्टैंड करीब 50 साल से चल रहा है। इसका न तो विस्तारीकरण हुआ और न ही दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया। शामली के जिला बनने के बाद भी रोडवेज बस स्टैंड के हालात नहीं सुधरे। करीब सवा साल पहले शामली आए तत्कालीन परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने रोडवेज बस स्टैंड के लिए शहर से बाहर जमीन तलाशने को कहा था लेकिन जमीन नहीं मिल पाई।
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इन्होंने कहा...
बस स्टैंड छोटा होने के कारण सभी बसें अंदर नहीं आ पातीं। केवल दिल्ली से सहारनपुर जाने वाली बसें ही बस स्टैंड के बाहर से सवारी बैठाती हैं। बस यहां पांच-दस मिनट ही खड़ी होती है। - राजेंद्र सिंह चौहान, वरिष्ठ केंद्र प्रभारी रोडवेज
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मंगलवार को नो-पार्किंग पर 64 वाहनों के चालान किए गए। रोडवेज बस स्टैंड में 10-15 बसें खड़ी करने की जगह है जबकि बसें सैकड़ों की संख्या में आती हैं। वह व्यवस्था बनाने के लिए रोडवेज को भी दो बार पत्र लिख चुके हैं। - भंवर सिंह, प्रभारी यातायात
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