-तापमान और उमस बढ़ने से शरीर से निकलने वाला पसीना बढ़ा रहा समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में तापमान बढ़ने के साथ ही उमस भी बढ़ रही है, जिससे शरीर पसीने-पसीने हो रहा है। चिपचिपाहट वाली गर्मी में त्वचा संबंधी रोग भी बढ़े हैं। सरकारी अस्पताल में चर्म रोग के मरीजों की लाइन लगी रहती है। चिकित्सकों का कहना है कि भीषण गर्मी के मौसम में त्वचा को सुरक्षित रखने के तरीके अपनाने चाहिए।
जिले में उमस भरी गर्मी बढ़ने के साथ ही त्वचा के मरीजों की तादाद भी बढ़ रही है। तेज धूप और पसीने के कारण फंगल इंफेक्शन, सनबर्न, स्किन एलर्जी, त्वचा पर दाने, चकते, दाद, खाज-खुजली और काले धब्बे पड़ने की समस्या को लेकर मरीज चिकित्सकों के पास आ रहे हैं। इसकी वजह यह है कि चिलचिलाती गर्मी में बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को गर्मी में बाहर निकलना पड़ता है। सीएचसी शामली रोजाना ओपीडी में 700-800 मरीज आते हैं। इनमें 35 से 40 प्रतिशत मरीज त्वचा संबंधी समस्याओं के होते हैं।
सीएचसी के चिकित्साधिकारी डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि सबसे जयादा मरीज त्वचा संबंधी रोगों के आ रहे हैं। इसकी वजह ये है कि सूरज की तपिश में त्वचा झुलसने से सूखी हो जाती है। गर्मी में शरीर से पसीना ज्यादा निकलता है। इससे एक तो त्वचा में नमी कम होती है, दूसरा पसीना सूखने पर वहां पर परत सी जम जाती है, जिससे त्वचा पर फंगल संक्रमण होने का खतरा हो जाता है। जहां पर पसीना सूखता है वहां पर चर्म रोग के कीटाणु तेजी से पैदा होने की आशंका रहती है। गर्मी के मौसम में त्वचा की सुरक्षा करने के उपाय करने से ही चर्म रोगों की समस्या से बचा जा सकता है।
सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ. रामनिवास ने बताया कि गर्मी बढ़ने पर त्वचा रोग के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। अस्पताल में चर्म रोग से संबंधित दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। मरीजों को त्वचा संबंधी कोई भी लक्षण नजर आता है तो चिकित्सक की सलाह लेकर दवा ले और उपचार कराएं। दोपहर के समय तेज धूप में निकलने से बचे। अगर जरूरी हो तो धूप से बचाव के इंतजाम करने के साथ घर से बाहर निकले।
चर्म रोग से ऐसे करें बचाव
रोजाना ताजे व ठंडे पानी से नहाएं।
पानी ज्यादा पीये।
सूती और ढीले कपड़े पहने।
लाल मिर्च, तेज मसालेदार व ज्यादा मीठा खाने से बचे।
दोपहर में बाहर निकलने से बचे।
चर्म रोग के लक्षण दिखने पर चिकित्सक की सलाह से दवा लें।
खानपान में संतुलित आहार ले।
हरी सब्जी व मौसमी फलों का सेवन करें।
केमिकल युक्त सौंदर्य प्रसाधन के स्थान पर प्राकृतिक प्रसाधन का इस्तेमाल करें।