शामली। कोयले के दाम में बेतहाशा वृद्धि के कारण आने वाले दिनों में घर बनाना और भी महंगा होगा। ईंटों के दाम में भारी वृद्धि होना तय माना जा रहा है। इसके चलते इस बार ईंट भट्ठे चलाना संचालकों के लिए भी आसान नहीं होगा। एक अप्रैल से ईंट भट्ठे चलाने की तैयारी शुरू हो गई हैं। जिसके लिए मजदूर भी पहुंच गए हैं, लेकिन इस बार यह घाटे का सौदा साबित हो सकता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा में ईंट भट्ठा उद्योग से लाखों मजदूर जुड़े हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत जिलों में 1040 ईंट भट्ठों पर 2.10 लाख मजदूर कार्य करते हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पूर्व में सितंबर से लेकर जून माह तक संचालित हो थे। अब इस क्षेत्र में शामिल जिलों में एक मार्च से लेकर 30 जून तक ही ईंट भट्ठों का चलाने की अवधि घोषित कर दी गई है। इसमें भी काफी समय विभिन्न एनओसी लेने में निकल जाता है। एनजीटी के आदेश पर प्रदूषण कम करने के लिहाज से पिछले एक साल में जिले के ईंट भट्ठे हाई ड्राफ्ट जिगजैग हो गए हैं।
छह हजार से 28 हजार रुपये टन हुआ कोयला
शामली। बीत वर्ष के मुकाबले इस बार कोयले का रेट छह हजार रुपये टन से बढ़कर 28 हजार टन हो गया है। डीजल के दाम में भी वृद्धि के चलते ईंट भट्ठा चलाना कठिन हो जाएगा। ईंट भट्ठा मालिकों के लिए एक हजार ईंट की लागत 5500 रुपये से बढ़कर छह हजार रुपये आएगी। ज्यादा रेट पर ईंटों की बिक्री नहीं होने से घाटे का सौदा होगा।
जिला ईंट निर्माता समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र मलिक ने बताया कि एक अप्रैल से पहले ईंट भट्ठा चलाने की तैयारी चल रही है। ईंट पथाई के लिए मजदूर पहुंच चुके हैं। भट्ठों पर अग्नि प्रज्वलित होनी शेष है। उनका कहना है कि 28 हजार प्रति टन कोयला और डीजल मंहगा होने के साथ ही जीएसटी पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किए जाने से प्रत्येक भट्ठा मालिक पर 80 लाख से एक करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त भार पड़ेगा। मौजूदा समय में अव्वल ईंट के दाम 5500 रुपये और दोयम के 4500 रुपये प्रति हजार हैं। भट्ठों पर पुरानी ईंटों का ज्यादातर स्टाक खत्म हो चुका है। इस बार नई ईंट भट्ठा मालिकों को छह हजार प्रति हजार से कम नहीं पड़ेंगी। पिछले सालों की अपेक्षा ईंटों की मांग इस बार कम है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में ईट भट्ठों और मजदूरों का आंकड़ा
जिला, भट्ठों की संख्या, मजदूर की संख्या
1. शामली- 140- 30 हजार
2. मुजफ्फरनगर- 300- 60 हजार
3. सहारनपुर- 200- 40 हजार
4. बागपत- 400- 80 हजार
कुल योग- 1040- 2.10 लाख