शामली। शामली में बने आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस में अभी तक काम पूरी तरह सुचारु हुआ भी नहीं की उसकी इमारत खस्ता होने लगी। हालत ये है कि फर्श धंस गया और बाउंड्रीवाल भी टूटने लगी। ऐसे में लाखों की लागत से बने पोस्टमार्टम हाउस के निर्माण की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगना शुरू हो गया है।
जनपद शामली का 2011 में सृजन हुआ था। इसके बाद यहां पर पोस्टमार्टम हाउस बनाने की तैयारी शुरू हो गई थी। शासन द्वारा बनत में 52 लाख रुपये से आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस बनने के लिए स्वीकृत किया गया। जिसका निर्माण संस्था पैकफेड़ ने कराया था। इसके बनने के बाद निर्माणादायी संस्था को स्वास्थ्य विभाग द्वारा एनओसी देकर इसके हैंडओवर भी ले लिया गया। इसमें पूरी तरह काम सुचारु भी नहीं हुआ कि यहां की दीवारें दरकनी शुरू हो गईं।
बाउंड्रीवाल में दरारें आ चुकी हैं और वह गिरने की कगार पर हैं। यही नहीं फर्श भी पूरी तरह बैठ चुका है। इसके अलावा बाउंड्रीवाल पर एंगल तो लगा दी गई, लेकिन उनके ऊपर तार नहीं लगाए गए। दो माह में ही 52 लाख की लागत से बनी इस बिल्डिंग में इतनी कमियां आ गईं हैं, तो गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है ही।
उधर, जिलाधिकारी सुजीत कुमार से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य यदि पोस्टमार्टम हाउस की बिल्डिंग के निर्माण में गुणवत्ता के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही बरती गई है, तो जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आखिर किस आधार पर दी गई एनओसी
संस्था पैकफेड़ के द्वारा पोस्टमार्टम हाउस का निर्माण कराया गया। शासन द्वारा करीब 50 लाख जारी किए गए थे, लेकिन दो माह में बिल्डिंग की इस हालत के बाद निर्माण में गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगा दिया। ऐसे में बिल्डिंग तैयार होने तक समय-समय पर जांच और निर्माण होने के बाद जेई द्वारा हैंडओवर के लिए बिल्डिंग को उपयुक्त बताते हुए एनओसी देना भी संदेह के घेरे में है।
गुणवत्ता के साथ किया गया। भराव की जमीन थी, यदि कहीं परेशानी है तो उसे ठीक करा दिया जाएगा। बिल्डिंग के निर्माण में कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। - अरविंद वर्मा, एई पैकफेड।