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कंबल नगरी गंगेरू: जहां हथकरघा संस्कृति ने रचा इतिहास

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गंगेरू मे दरी, कंबल बनाते कारीगर । संवाद
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कांधला। कांधला क्षेत्र के गंगेरू गांव में बने कंबल विदेशों तक धूम मचा रहे हैं। इटली में इनकी जबर्दस्त मांग है। गंगेरू कंबल नगरी के रूप में जानी जाती है।
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ग्रामीण अहसान, नवाब और गुफरान ने बताया कि बुजुर्गों ने मेहनत से बच्चों को शिक्षित किया और जब नई पीढ़ी बाहर निकली तो आधुनिक तकनीकों की ओर मुड़ी। गांव के सरवर अंसारी ने 1999 में एसजीएसवाई योजना के अंतर्गत एक स्वयं सहायता समूह बनाया। वर्ष 2000 में प्रगति मैदान दिल्ली में समूह की ओर से भेजे गए उत्पादों को हांगकांग के एक खरीदार ने पूरा का पूरा स्टॉल ही खरीद लिया।
प्रगति मैदान के हथकरघा विभाग की वस्तुओं से प्रेरित होकर गंगेरू में भी खेस, पायदान, सोफा सीट कवर, रनर जैसी आधुनिक वस्तुओं का निर्माण शुरू हुआ, जिन्हें जबरदस्त सराहना मिली। इसी क्रम में 2008 में भारत सरकार के तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने सरवर अंसारी की दुकान का दौरा किया और उन्हें इटली के मिलान ट्रेड फेयर में भारत का प्रतिनिधित्व करने भेजा। अब इटली के अलावा जम्मू, हरियाणा, पंजाब, बिहार समेत विभिन्न स्थानों पर तैयार उत्पात भेजे जा रहे हैं।

गंगेरू मे दरी, कंबल बनाते कारीगर । संवाद

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