शामली। पंजाब में नशे के बढ़ते कारोबार और युवाओं में बढ़ती नशे की लत पर हाल ही में एक फिल्म बनी थी उड़ता पंजाब। अगर इस फिल्म की तुलना कैराना के भूरा गांव से की जाए, तो किसी को भी अचंभा नहीं होगा। यहां खुलेआम नशीले पदार्थों की सप्लाई की जाती है। गांव में ज्यादातर युवा नशे के आदी हो चुके हैं। यहीं नहीं गांव में पिछले कुछ सालों में नशे के कारण कई लोगों की मौत तक हो चुकी है।
20-25 हजार की आबादी वाला भूरा गांव में अधिकतर युवा नशे के आदि हो चुके हैं। यहां पर हालत दिन प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं। स्थिति यह हो चुकी है कि यदि युवाओं को एक निश्चित समय पर नशीला पदार्थ नहीं दिया जाए, तो वे किसी भी तरह की वारदात को अंजाम देने के लिए उतारू हो जाते हैं। इसी गांव से क्षेत्र में नशीले पदार्थों की सप्लाई की जाती है। इंजेक्शन, स्मैक, चरस और डोडा आदि की खुलेआम सप्लाई होती है। इतना सब कुछ होने के बाद भी आज तक पुलिस इस पर रोक नहीं लगा पाई है।
नशे के चलते हो चुकी है कई की मौत
भूरा गांव में नशीले पदार्थ के मामले में अभी तक दर्जनों मौत हो चुकी है। गांव में अय्यूब, मिन्ना, शाहदीन, रुकम, अशोक, पप्पू, शाहदीन, अमजद, मेहरबान, मुनीर, माजिद उर्फ काला, वाजिद, जाहिद, अब्बास, अख्तर, इरफान, अलीशेर, सुरेन, सुभा, पितम आदि की मौत हो चुकी है। वहीं, इन मौतों के बाद अभी भी गांव में करीब ऐसे डेढ़ सौ युवक है, जो नशे के घोर आदी है और आज स्थिति यह है कि वह भी मौत के मुंह पर बैठे हुए है। यदि समय रहते उनको काउंसलिंग करके उनका इलाज नहीं किया गया तो उनकी भी मौत दूर नहीं है।
पुलिस-प्रशासन नशे के लिए जिम्मेदार
गांव में सालों से नशीले पदार्थों की तस्करी की जा रही है। जाहिर है कि इसकी जानकारी पुलिस को न हो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। पुलिस द्वारा समय रहते नशीले पदार्थों के तस्करों और विक्रेताओं पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई। इसी के चलते यह समस्या भूरा गांव तथा यहां की जनता के लिए नासूर बन गई है।
नशीले पदार्थों की बिक्री के भूरा में 24 ठिकाने
शामली(ब्यूरो)। गांव भूरा में नशीले पदार्थों की बिक्री परचून की दुकान पर बिकने वाले सामान की तरह होती है। बताया जाता है कि यहां पर गांव में कुल 24 दुकानें है, जिन पर नशीले पदार्थों की बिक्री होती है। वहीं, नशे के खिलाफ आवाज उठा रहे ग्राम प्रधान अहसान का कहना है कि गांव में 24 दुकानें है जिन पर नशीले पदार्थ की बिक्री जाती है, लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
उधर, एसपी विजय भूषण ने बताय कि भूरा गांव में नशीले पदार्थ की बिक्री नहीं होनी दी जाएगी। जनता को भी जरूरत है कि इसका विरोध करें और इस बुराई से अपने बच्चों को दूर करें। पूर्व में कई नशीले पदार्थ के तस्करों को पुलिस द्वारा जेल भी भेजा जा चुका है।
नशे से दूर रहने का संकल्प दिलाया
कैराना। ग्राम भूरा स्थित मदरसे में नशा मुक्ति एवं मतदाता जागरूकता अभियान के तहत जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने क्षेत्रवासियों को नशे की लत से दूर रहने का संकल्प दिलाया। शनिवार को ग्राम भूरा स्थित इस्लामिया मदरसे में नशा मुक्ति व मतदाता जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया।
जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने कहा कि भूरा गांव में अब तक नशे के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है तथा दर्जनों लोग अब भी नशे की चपेट मे है। अगर अब भी सही दिशा में कदम नहीं उठाया तो स्थिती और भी खराब हो जायेगी। नशा करना कोई मजबूरी नहीं होती। अगर अब भी हम नहीं संभले तो नशा खोरी पुरे गांव में फैल जायेगी। युवा वर्ग को कडा निश्चय करना होगा कि आज से वो नशा नहीं करेगे। साथ ही डीएम ने चेतावनी भी दी कि अगर कोई नशे का कारोबार करने वाले गांव के युवाओं को जहर रूपी नशा देता है तो उसके विरूद्ध कडी से कडी कार्रवाई की जायेगी। पुलिस अधीक्षक विजय भूषण ने कहा कि नशाखोरी भी एक आंतक की तरह है। जो भाई से भाई को लडा देती है।
अगर हम अब भी नही जागे तो आने वाला समय बहुत ही खराब होगा। जिस तरह अग्रेंजों ने हिन्दुस्तानियों को चाय की लत डाली थी ठीक आज हीरोइन, ड्रग्स, स्मैक का नशा हमारे समाज में फैल रहा है। अगर सभी लोग शिक्षा को प्रचार प्रसार करे तो शिक्षा के तहत ही नशाखोरी पर लगाम कसी जा सकती है। उन्होंने लोगों को अपने बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए कहा। साथ ही उन्होंने पिछले डेढ माह से ग्राम प्रधान अहसान व उसके 20 साथियों द्वारा गांव में चलाये जा रहे नशाखोरी के विरुद्ध चजाए जा रहे अभियान की भी सराहना की। इस अवसर पर एसडीएम भानू प्रताप यादव, सीओ भूषण वर्मा, कोतवाली प्रभारी एपी भारद्वाज, आर्य कन्या इंटर कालेज की प्रधानाचार्या शोभा गुप्ता, ग्राम प्रधान अहसान के अलावा सैकडों ग्रामीण मौजूद रहे।