शामली। सर्दी बढ़ने के साथ ही प्रदूषण से हालात बदतर हो गए हैं। दिवाली पर होने वाली आतिशबाजी प्रदूषण और बढ़ा देगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपने स्तर से जो उपाय कर रहा है वह नाकाफी हैं। इसलिए आम जन को भी प्रदूषण के खिलाफ मुहिम में आगे आना होगा। इस बार पिछले वर्ष जैसे हालात न हों इसके लिए पटाखे नहीं छुड़ाना ही बेहतर है।
खुशियों के साथ आने वाली दिवाली अब परेशानियां ला रही हैं। पटाखों के कारण फिजाओं में जहर घुल रहा है, जो शरीर के भीतर जाकर लोगों को बीमार कर रहा है। क्यों न इस दिवाली पटाखों से दूरी बनाकर पर्यावरण को साफ रखने के सहयोग किया जाए। वैसे भी पूरा एनसीआर क्षेत्र प्रदूषण की जद में है। दिवाली की आतिशबाजी हालात को और खराब कर सकती है। अमर उजाला की पहल एक युद्ध पटाखों के विरुद्घ के साथ आकर खुद भी पटाखे न चलाने का संकल्प लें और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करें।
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स्मॉग से सांस लेना भी हो गया था मुश्किल
शामली। पिछले वर्ष दिवाली के बाद जिले में हालात खराब हो गए थे। प्रदूषण इतना बढ़ गया था कि सांस लेना तक मुश्किल हो गया था। न केवल हाईवे बल्कि घनी बस्तियों में स्मॉग घरों में घुस रहा था। जिले में वायु प्रदूषण मापने की व्यवस्था नहीं लेकिन स्मॉग की स्थिति इतनी ज्यादा थी कि खुले स्थानों पर आंखें खोलने पर जलन महसूस हो रही थी और सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी थी।
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पटाखे न चलाकर बचाएं पर्यावरण
- पटाखे चलाकर हम कई तरह का नुकसान करते हैं। एक ओर तो हम वायु प्रदूषण बढ़ाते और दूसरी तरफ ध्वनि प्रदूषण को भी बढ़ावा देते हैं। साथ ही पटाखे जलाकर आर्थिक हानि भी उठाते हैं। इस बार पर्यावरण हितैषी दिवाली मनाएं। पटाखे न चलाएं और दूसरों को भी इससे प्रेरित करें। इससे तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण की कुछ रोकथाम होगी। - सलिल द्विवेदी, प्रधान, हनुमान धाम प्रबंध कमेटी।
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बीमारों और बुजुर्गों के बारे में भी सोचें
पटाखे छुड़ाने से पहले बीमारों और बुजुर्गों के बारे में भी सोचें। तेज आवाज और धुएं के कारण उन्हें बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्थमा रोगियों की परेशानी प्रदूषण के साथ और बढ़ जाती है। प्रदूषण न केवल बुजुर्गों बल्कि हर आयु के व्यक्ति के लिए बेहद खतरनाक होता है। अपना और सबका हित सोचें और पटाखे न जलाएं। - डॉ. रुचिता ढाका, प्रधानाचार्या, श्री जैन कन्या इंटर कॉलेज